छात्रों के लिए 'कीड़ा' शब्द इस्तेमाल करने से विजयवर्गीय का इंकार, दावे पर कायम सिंघार
जोहेब
- 22 Jul 2026, 09:57 PM
- Updated: 09:57 PM
भोपाल, 22 जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा की कार्यवाही के रिकार्ड का हवाला देते हुए बुधवार को कांग्रेस के इन आरोपों का खंडन किया कि उन्होंने जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों के लिए 'कीड़ा' शब्द इस्तेमाल किया।
हालांकि, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि गांवों में कॉकरोच को कीड़ा ही कहा जाता है और विजयवर्गीय को इस टिप्पणी के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।
सिंघार ने मंगलवार को विजयवर्गीय पर विधानसभा में छात्रों के लिए 'कीड़ा' शब्द का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था।
विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने सदन की कार्यवाही का रिकार्ड देखा और सिंघार के आरोपों को ग़लत बताया।
मंत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि वह सिंघार से इस विषय पर बात करेंगे।
विजयवर्गीय ने आरोपों को 'षडयंत्र का हिस्सा' करार देते हुए कहा कि वह नेता प्रतिपक्ष से किसी भी प्रकार की कोई अपेक्षा नहीं करते कि वह खेत प्रकट करें या माफी मांगे।
उन्होंने कांग्रेस नेता के बयान को गैरजिम्मेदाराना बताया और उनपर सदन की मर्यादा व परंपराओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "मुझे चिंता है...हम लोग तो चले जाएंगे पर आने वाली पीढ़ियां जब रिकॉर्ड देखेंगी तो अच्छा संदेश नहीं जाएगा।"
सिंघार ने बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, "गांवों में आज भी कॉकरोच को कीड़ा ही कहते हैं। भारत के प्रधान न्यायाधीश ने भी कॉकरोच पर टिप्पणी की थी, जिसके खिलाफ देशभर के युवाओं ने आक्रोश जताया था।"
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि छात्रों को 'कॉकरोच' कहना युवाओं का अपमान है।
उन्होंने कहा, "अगर सदन में छात्रों और युवाओं के संदर्भ में 'कॉकरोच' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, तो यह सिर्फ एक टिप्पणी नहीं, बल्कि पूरे युवा वर्ग का अपमान है।"
उन्होंने कहा कि युवा अपने भविष्य, शिक्षा और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं, ऐसे में उन्हें अपमानित करना या उन पर देश को अस्थिर करने जैसे आरोप लगाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा, "कैलाश विजयवर्गीय को इस टिप्पणी पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। लोकतंत्र में सवाल पूछने वाले युवाओं का सम्मान होना चाहिए, अपमान नहीं।"
भाषा ब्रजेन्द्र जोहेब
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