अमित शाह ने सबसे बड़े दही संयंत्र की आधारशिला रखी, बंगाल के राजनीतिक परिवर्तन को अभूतपूर्व बताया
नेत्रपाल
- 19 Jul 2026, 09:41 PM
- Updated: 09:41 PM
कोलकाता, 19 जुलाई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में हुआ राजनीतिक परिवर्तन आजादी के बाद देश में हुए किसी भी बदलाव से अलग है।
शाह ने दावा किया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नयी भाजपा सरकार ने वाम दलों और तृणमूल कांग्रेस के दशकों के ''कुशासन'' के बाद 'सोनार बांग्ला' के सपने को साकार करने की फिर से मुहिम शुरू की है।
उन्होंने हावड़ा जिले के सांकराइल में 700 करोड़ रुपये की लागत वाली अमूल बंगाल डेरी परियोजना की डिजिटल माध्यम से आधारशिला रखने और भूमि पूजन करने के बाद कहा कि वह विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से पश्चिम बंगाल के लोगों का मुंह 'मिष्टी दोई' (मीठे दही) से मीठा कराने आए हैं।
इस परियोजना के तहत दुनिया का सबसे बड़ा दही उत्पादन संयंत्र स्थापित किया जाएगा।
शाह ने कहा, ''पश्चिम बंगाल की जनता ने जो राजनीतिक बदलाव किया है, वह आजादी के बाद देश के किसी भी राज्य में हुए राजनीतिक परिवर्तन से अलग है।''
इस मौके पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और वरिष्ठ मंत्री मौजूद थे।
राज्य के अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुए शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल कभी शिक्षा, संस्कृति, अध्यात्म, स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रवाद के क्षेत्र में पूरे देश के लिए मार्गदर्शक था।
उन्होंने कहा, ''पश्चिम बंगाल कभी हर क्षेत्र में पूरे देश का मार्गदर्शक था। शिक्षा के क्षेत्र में यह देश के बाकी हिस्सों से कई दशक आगे था। चाहे स्वतंत्रता संग्राम हो या देश का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नवजागरण, पश्चिम बंगाल ने भारत को अनेक महान नेता और स्वतंत्रता सेनानी दिए।''
शाह ने कहा, ''चाहे चैतन्य महाप्रभु हों, स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस या महर्षि अरविंद, इस राज्य ने एक असाधारण परंपरा का निर्माण किया। चाहे नेताजी सुभाष चंद्र बोस हों या खुदीराम बोस, पश्चिम बंगाल ने राष्ट्र के लिए बलिदान देने में कभी संकोच नहीं किया।''
उन्होंने आरोप लगाया कि हालांकि, उसके बाद राज्य ने कई दशकों तक राजनीतिक पतन का दौर देखा।
शाह ने कहा, ''पश्चिम बंगाल तीन दशक तक विदेशी विचारधारा से प्रभावित कम्युनिस्ट सरकार के अधीन रहा। उससे मुक्त होने के बाद राज्य ऐसी तृणमूल कांग्रेस के चंगुल में फंस गया, जो विचारधारा विहीन, भ्रष्ट और आपराधिक तत्वों से जुड़ी थी। हमारी आंखों के सामने गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के 'सोनार बांग्ला' के सपने को नष्ट कर दिया गया।''
शाह ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने उस सपने को साकार करने की फिर से मुहिम शुरू की है। उन्होंने कहा, ''एक दशक लंबे संघर्ष और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान के बाद अब शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में 'सोनार बांग्ला' का आंदोलन फिर से शुरू हुआ है।''
गृह मंत्री ने पश्चिम बंगाल के अपने तीन दिवसीय दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने शासन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की है। उन्होंने कहा, ''हमने घुसपैठ रोकने, कानून-व्यवस्था मजबूत करने और महिलाओं की सुरक्षा बेहतर करने के लिए कई कदमों पर चर्चा की और निर्णय लिए हैं।''
राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए इस डेरी परियोजना को एक ऐतिहासिक पहल बताते हुए शाह ने कहा कि इससे दुग्ध उत्पादकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और पूर्वी भारत के डेरी क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
राज्य की पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए शाह ने दावा किया कि उसने गुजरात स्थित डेरी सहकारी संस्था अमूल के पश्चिम बंगाल में प्रवेश का विरोध किया था।
शाह ने कहा, ''मैंने एक बार तत्कालीन मुख्यमंत्री (ममता बनर्जी) से अनुरोध किया था कि यदि 15-15 एकड़ के दो भूखंड उपलब्ध करा दिए जाएं, तो पश्चिम बंगाल से पूरे पूर्वी भारत के डेरी क्षेत्र का विकास किया जा सकता है। उस समय मुझसे कहा गया था कि गुजरात को राज्य में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।''
शाह ने कहा, ''लेकिन यह गुजरात के लिए नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल के पशुपालकों के लिए है।''
उन्होंने वर्तमान भाजपा सरकार की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में राजनीतिक परिवर्तन के कारण ही यह परियोजना संभव हो सकी। उन्होंने कहा, ''यहां आते समय मैंने अधिकारी से भूमि मांगी और उन्होंने अमूल फेडरेशन को नि:शुल्क भूमि उपलब्ध कराने पर तत्काल सहमति दे दी।''
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार पशुपालन विभाग के माध्यम से राज्य में पशुधन क्षेत्र के और विकास के लिए काम करेगी तथा लोगों के लिए आजीविका के अतिरिक्त अवसर सृजित करेगी।
उन्होंने कहा, ''आज पश्चिम बंगाल के किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। अमूल ने उस संयंत्र के लिए भूमि पूजन किया है, जो दुनिया का सबसे बड़ा दही उत्पादन संयंत्र बनेगा। इस पहल से करीब 1.20 लाख छोटे डेरी किसानों और पशुपालकों को लाभ मिलेगा।''
करीब 700 करोड़ रुपये के निवेश वाली इस परियोजना में प्रतिदिन 30 लाख लीटर दूध का प्रसंस्करण किया जाएगा और हर दिन 10 लाख किलोग्राम दही तथा अन्य डेरी उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा। इससे पश्चिम बंगाल के 1.25 लाख से अधिक डेरी किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनमें 30,000 से अधिक महिलाएं शामिल हैं।
इस परियोजना का उद्देश्य पूर्वी भारत में सहकारी डेरी नेटवर्क को मजबूत करना और राज्य के दुग्ध उत्पादकों के लिए स्थायी बाजार तैयार करना है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी इस अवसर पर राज्य की पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए इस निवेश को भाजपा सरकार की औद्योगिक नीति से जोड़ा।
उन्होंने कहा, ''कुछ लोग कहा करते थे कि वे पश्चिम बंगाल को गुजरात नहीं बनने देंगे। आज वही लोग घर बैठकर टेलीविजन पर देख रहे हैं कि गुजरात का अमूल पश्चिम बंगाल के विकास के लिए 700 करोड़ रुपये का निवेश कर रहा है।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निवेश सरकार बदलने के बाद उद्योग जगत के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने निजी निवेश आकर्षित करने के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
यह कार्यक्रम शाह के तीन दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे के समापन का प्रतीक था। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय पुस्तकालय परिसर में 'शब्द संग्रहालय' के उद्घाटन सहित कई आधिकारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और सुरक्षा तथा प्रशासनिक मुद्दों पर राज्य सरकार के साथ कई बैठकें कीं।
भाषा अमित नेत्रपाल
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