राम मंदिर मामले पर प्रधानमंत्री से जवाबदेही की दरकार, चुप्पी तोड़ें: कांग्रेस
संतोष
- 10 Jul 2026, 07:48 PM
- Updated: 07:48 PM
नयी दिल्ली/देहरादून/चंडीगढ़, 10 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराई जाए तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस ''महापाप'' पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए।
मुख्य विपक्षी दल ने राम मंदिर चढ़ावा मामले में अपने अभियान को तेज करते हुए शुक्रवार को कई शहरों में संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया।
पार्टी शनिवार और रविवार को भी कई शहरों में इसी विषय पर पत्रकार वार्ता का आयोजन करेगी। कांग्रेस ने 50 से अधिक शहरों में संवाददाता सम्मेलन की योजना बनाई है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''अयोध्या के भगवान श्रीराम मंदिर में भाजपा-आरएसएस के लोगों ने चढ़ावा चोरी और जमीन खरीद-निर्माण में घोटाले करके अक्षम्य महापाप किया है। इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी खतरनाक मिलीभगत के संकेत दे रही है। देश उनसे जवाबदेही चाहता है, लेकिन वह हर बार की तरह मौन साधे हुए हैं।''
उन्होंने कहा, ''इस मुद्दे को लेकर आज कांग्रेस नेताओं ने आठ पत्रकार वार्ताएं कीं। इस अभियान के तहत 12 जुलाई तक देशभर में 50 से ज्यादा पत्रकार वार्ताएं करके भाजपा-आरएसएस को जवाबदेही के लिए मजबूर किया जाएगा।''
पार्टी के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने पार्टी के इस अभियान के तहत उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में मोर्चा संभाला और संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) राम मंदिर के नाम पर चंदा एकत्र करते रहे हैं।
उनका कहना था कि चढ़ावा मामले में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ''मैं केवल एक सवाल पूछना चाहता हूं कि चंदा चोरी के लिए कौन जिम्मेदार है? राम मंदिर ट्रस्ट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की देखरेख में बनाया गया। प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं? ''
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराई जाए।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शक्ति सिंह गोहिल ने चंडीगढ़ में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए दावा किया कि कथित चोरी का मामला सामने आने से पहले राम मंदिर में प्रतिदिन 16 से 18 लाख रुपये का दान आता था, लेकिन मामला उजागर होने के बाद यह राशि बढ़कर 24 से 26 लाख रुपये प्रतिदिन हो गई।
उन्होंने दावा किया कि इससे प्रतिदिन लगभग 10 लाख रुपये के कथित हेरफेर का संकेत मिलता है।
गोहिल ने मांग की कि वर्तमान राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करके नया ट्रस्ट गठित किया जाए, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और पूरे मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराई जाए।
कांग्रेस नेता राजीव गौड़ा ने चेन्नई में संवाददाताओं से कहा कि भाजपा, आरएसएस और संघ परिवार ने राम मंदिर निर्माण का पूरा श्रेय लिया था, इसलिए मंदिर में हुई कथित लूट की जिम्मेदारी भी उन्हें ही लेनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण के बाद से वित्तीय अनियमितताओं का स्तर असाधारण रहा है।
कांग्रेस के मध्यप्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने इंदौर में आरोप लगाया कि भाजपा ने राजनीतिक लाभ के लिए अधूरे राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम आयोजित किया और सनातन परंपरा की उपेक्षा की।
उन्होंने दावा किया कि मंदिर से जुड़े आयोजनों में साधु-संतों का सम्मान नहीं किया गया और पूरा श्रेय प्रधानमंत्री मोदी ने लिया।
कांग्रेस का समर्थन करने वाले निर्दलीय लोकसभा सदस्य राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने कानपुर में कहा कि यदि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ था तो चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
उन्होंने सवाल किया कि यदि सब कुछ सही था तो ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने अपने पद क्यों छोड़े और पूरे मामले में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर ही कार्रवाई क्यों की जा रही है?
यादव ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
भाषा हक हक संतोष
संतोष
1007 1948 दिल्ली