महिला संगठनों ने आरक्षण को तुरंत लागू करने की मांग की, 20 जुलाई को विरोध प्रदर्शन की घोषणा
माधव
- 10 Jul 2026, 06:41 PM
- Updated: 06:41 PM
नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) कई महिला संगठनों और महिला अधिकार मंचों ने शुक्रवार को एकजुट होकर मांग की कि महिला आरक्षण कानून को जनगणना और प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया से अलग करके तुरंत लागू किया जाए। इसके साथ ही इन संगठनों ने एक देशव्यापी अभियान की घोषणा की जिसके तहत 20 जुलाई से जंतर-मंतर पर धरना दिया जाना भी शामिल है।
यहां एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कार्यकर्ताओं ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़ने वाले प्रावधान को हटाने के लिए सरकार से संसद के आगामी मॉनसून सत्र में एक संवैधानिक संशोधन लाने का आग्रह किया।
यह अभियान संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को शुरू होगा और इसमें दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देना भी शामिल होगा।
कार्यकर्ता पूरे मॉनसून सत्र के दौरान विरोध प्रदर्शन जारी रखने की योजना बना रहे हैं।
आरक्षण के लिए यह विरोध प्रदर्शन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के जारी आंदोलन के साथ-साथ होगा। कॉजपा की ओर से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले 'राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा' (नीट) के अभ्यर्थियों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग की जा रही है।
साथ ही, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और 'एआईएसए' (आईसा) के छात्र कार्यकर्ताओं का एक समूह भी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहा है।
कॉजपा अपनी मांगों को मनवाने के लिए 20 जुलाई को संसद तक मार्च करने की योजना बना रही है, लेकिन महिला समूहों ने कहा है कि वे इस मार्च में शामिल नहीं होंगी।
उन्होंने कहा कि उन्हें 20 जुलाई के विरोध प्रदर्शन के लिए पहले ही अनुमति मिल चुकी है।
इसी तरह के धरने और विरोध कार्यक्रम राज्यों और ज़िलों में आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, कार्यकर्ता अपने निर्वाचन क्षेत्रों में सांसदों से मिलेंगे, महिलाओं को इस मुद्दे पर जागरूक करने के लिए जनसंपर्क कार्यक्रम करेंगे और मुख्य रूप से विपक्षी दलों की महिला सांसदों का एक सम्मेलन आयोजित करेंगे।
सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी ने कहा, ''हम चाहते हैं कि आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से अलग किया जाए और इसे आने वाले मॉनसून सत्र में तुरंत लागू किया जाए। हम कोई देरी नहीं चाहते और न ही यह चाहते हैं कि हमें मूर्ख बनाया जाए। हम नहीं चाहते कि हमारे साथ दूसरे दर्जे के नागरिकों जैसा व्यवहार किया जाए और यह कहा जाए कि संसद का विस्तार होने के बाद ही हमारे लिए जगह होगी। हम इसी संसद में जगह चाहते हैं।''
उन्होंने कहा कि यह अभियान देश भर की लाखों महिलाओं तक पहुंचेगा और इसमें सांसदों के साथ बैठकें और जमीनी स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम शामिल होंगे।
'सतर्क नागरिक संगठन' की अंजलि भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण का इस्तेमाल राजनीतिक रूप से विवादास्पद परिसीमन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कर रही है।
उन्होंने कहा, ''परिसीमन को मंज़ूरी दिलाने के लिए हमारा इस्तेमाल न करें।''
वर्ष 2026 में संसद के विशेष सत्र का जिक्र करते हुए भारद्वाज ने कहा कि सरकार ने दावा किया था कि वह 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना चाहती है, लेकिन साथ ही उसने परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन के जरिए लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने की कोशिश भी की थी। उन्होंने बताया कि वह प्रस्ताव संसद में गिर गया था।
उन्होंने कहा, ''सरकार को विधेयकों को सार्वजनिक करके और लोगों की राय लेकर कानून बनाने से पहले की चर्चा करने की नीति का पालन करना चाहिए।''
भारद्वाज ने यह भी तर्क दिया कि परिसीमन एक राजनीतिक रूप से विवादित मुद्दा है, जिसमें यह चिंता है कि इससे दक्षिणी राज्यों के नुकसान और उत्तरी राज्यों को फायदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को ऐसी बहस से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
कार्यकर्ता जगमती सांगवान ने कहा कि उन्होंने पहले ही पोस्टर, गाने और नारे जारी कर दिए हैं और वे आरक्षण को तुरंत लागू करने का दबाव बनाने के लिए विपक्षी नेताओं से मिलकर अपनी कोशिशें और तेज करेंगी।
उन्होंने कहा, ''महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़ने का कोई तर्क नहीं है। हम देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे और आरक्षण को तुरंत लागू करने के लिए दबाव बनाना जारी रखेंगे।''
'नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन विमेन' की एनी राजा ने कहा कि महिला संगठन विपक्षी नेताओं को पत्र लिखकर आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से अलग करने के लिए उनका समर्थन मांग रहे हैं और महिला सांसदों के एक सम्मेलन की योजना भी बना रहे हैं।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता मैमूना मोल्लाह ने सरकार पर महिलाओं से किए गए वादे से मुकरने का आरोप लगाया। उन्होंने आरक्षण को जनगणना और परिसीमन से जोड़ने को 'राजनीतिक बेईमानी' करार दिया।
संसद ने सितंबर 2023 में एक विशेष सत्र के दौरान संविधान (106वां संशोधन) विधेयक पारित किया, जिसे आम तौर पर महिला आरक्षण विधेयक या 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के नाम से जाना जाता है।
यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है।
हालांकि, इसमें यह भी कहा गया है कि यह आरक्षण कानून लागू होने के बाद होने वाली पहली जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होगा और इसे उस प्रक्रिया के बाद होने वाले चुनाव से लागू किया जाएगा।
भाषा संतोष माधव
माधव
1007 1841 दिल्ली