राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण से भारत की छवि खराब हुई : अखिलेश
जोहेब
- 08 Jul 2026, 03:50 PM
- Updated: 03:50 PM
लखनऊ, आठ जुलाई (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बुधवार को आरोप लगाया कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी होने की खबरों ने वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार पर उसकी धार्मिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक व आर्थिक विश्वसनीयता खोने का आरोप भी लगाया।
यादव ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में दावा किया कि मंदिर के दान में गड़बड़ी की खबर दुनिया भर में फैल गई है जिससे विदेश में रहने वाले सनातनी लोग शर्मसार और आहत हैं।
उन्होंने पोस्ट में कहा, ''अयोध्या के मंदिर से चढ़ावा, चंदा, दान चोरी का समाचार समस्त विश्व में फैल चुका है। दुनिया के विभिन्न देशों में रहनेवाला सनातनी भाजपा और उनके संगी-साथियों के कृत्यों से हो रही बदनामी की वजह से शर्मसार हैं और इसलिए आहत भी कि उन्होंने भी मंदिर में दान-चंदा भिजवाया था या स्वयं आकर चढ़ाया था।''
यादव ने कहा कि इस प्रकरण से पूरी दुनिया में सनातन समाज के लोग आक्रोशित हैं क्योंकि धर्म के साथ देश को भी 'भाजपाई अधर्मियों' के कारण अपयश का शिकार होना पड़ रहा है।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने पोस्ट में दावा करते हुए कहा, ''दुनिया भर के निवेशक भी अब अपना हाथ खींच रहे हैं क्योंकि उन्हें लग रहा है कि ऐसी सरकार का क्या भरोसा जिसने अपने भगवान के दानपात्र तक को नहीं छोड़ा, वे कल को हमारे निवेश को क्या छोड़ेगी। भाजपा सरकार ने अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक विश्वसनीयता पूरी तरह खो दी है।''
सपा प्रमुख ने एक अन्य पोस्ट में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे द्वारा लगाए गए आरोपों को झूठा बताते हुए खारिज कर दिया। दुबे ने यादव को चढ़ावा चोरी मामले के आरोपी रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव से जोड़ा था।
यादव ने दुबे पर कटाक्ष करते हुए पोस्ट में कहा, ''भाजपाइयों से गलती ये हुई है कि उन्होंने उससे झूठे आरोप लगवाए-बढ़वाए जिनका व्यक्तिगत रिकॉर्ड, ऐतिहासिक रूप से बदनाम है और जिनकी महाभ्रष्टाचारी सामाजिक-राजनीतिक दूषित छवि की वजह से उनके अपने दल के लोग ही, उन्हें आस-पास भटकने नहीं देते हैं।''
उन्होंने कहा, ''इनकी (दुबे) इतनी ही योग्यता और उपयोगिता है कि महाझूठ प्रसारण के लिए उनको लाउडस्पीकर की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें न तो उनकी आवाज होती है, न विचार। ये दूसरों के हाथ के उपकरण मात्र हैं। इनकी स्वयं की कोई व्यक्तिगत साख नहीं है, ये किसी शाख की उपशाख हैं।''
भाषा सलीम जोहेब
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