निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में हर 14 में से एक महिला को समय पूर्व रजोनिवृत्ति: अध्ययन
पवनेश
- 08 Jul 2026, 03:37 PM
- Updated: 03:37 PM
नयी दिल्ली, आठ जुलाई (भाषा) निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में रहने वाली 30 से 49 वर्ष की उम्र की प्रत्येक 14 में से एक महिला ऐसी है जिसे समय से पहले रजोनिवृत्ति का सामना करना पड़ा। 'ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (बीएमजे) ग्लोबल हेल्थ' में प्रकाशित एक अध्ययन में यह अनुमान जताया गया है।
बांग्लादेश स्थित 'इंटरनेशनल सेंटर फॉर डायरीअल डिजीज रिसर्च' के शोधकर्ताओं ने कहा कि समय पूर्व रजोनिवृत्ति के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले परिणाम इन देशों, खासकर दक्षिण एशिया, पूर्वी एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र तथा उप-सहारा अफ्रीका के देशों में स्वास्थ्य प्रणालियों पर दबाव डालेंगे।
महिलाओं में आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच रजोनिवृत्ति होती है। यदि यह 45 वर्ष की आयु से पहले होती है तो इसे समय से पहले रजोनिवृत्ति माना जाता है और यदि 40 वर्ष की आयु से पहले होती है तो इसे असमय (प्रीमैच्योर) रजोनिवृत्ति कहा जाता है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि समय से पहले रजोनिवृत्ति के मामले शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार अधिक पाए गए तथा शिक्षा और देर से संतान पैदा करने से इसका जोखिम काफी हद तक कम हो सकता है।
अध्ययन में 2015 से किए गए 'डेमोग्राफिक एंड हेल्थ सर्वे' (डीएचएस) के आंकड़ों को मिलाकर विश्लेषण किया गया। इसमें भारत, इंडोनेशिया, गैबॉन और जॉर्डन जैसे 44 निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों की 30 से 49 वर्ष की आयु की 7,16,648 महिलाओं के आंकड़े शामिल किए गए। इन देशों में महिलाओं में उच्च आय वाले देशों की तुलना में रजोनिवृत्ति अपेक्षाकृत जल्दी होती है।
अध्ययन में भारत की लगभग 3,65,000 महिलाओं के आंकड़े शामिल किए गए।
समय से पहले और असमय रजोनिवृत्ति से हृदय रोग, हड्डियों के कमजोर होने की बीमारी ऑस्टियोपोरोसिस, चयापचय संबंधी विकार, संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट, अवसाद और जल्दी मृत्यु का जोखिम बढ़ सकता है। ये स्थितियां जनस्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी चिंताएं पैदा करती हैं और महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं।
जून में 'द लांसेट ऑब्सटेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी एंड विमेन्स हेल्थ' पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, यूरोपीय महिलाओं की तुलना में दक्षिण एशियाई महिलाओं में असमय रजोनिवृत्ति का जोखिम 34 प्रतिशत अधिक है। दक्षिण एशियाई देशों में करीब आधी महिलाएं 47.4 वर्ष की उम्र तक रजोनिवृत्ति की अवस्था में पहुंच जाती हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि 7,16,648 महिलाओं में से 51,000 से अधिक महिलाएं असमय या समय से पहले रजोनिवृत्ति से प्रभावित थीं। यह आंकड़ा पहले के वैश्विक अनुमानों की तुलना में काफी अधिक है।
इसके सबसे अधिक मामले इथियोपिया में (12 प्रतिशत) पाए गए। इसके बाद इंडोनेशिया में 11.5 प्रतिशत और म्यांमा में 10 प्रतिशत से अधिक मामले पाए गए।
शोधकर्ताओं ने कहा कि ये निष्कर्ष स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, पोषण की स्थिति, शिक्षा के अवसरों और कार्यस्थल से जुड़े जोखिमों में बुनियादी असमानताओं को दर्शाते हैं।
भाषा सिम्मी पवनेश
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