भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों की हवा साफ करने के लिए भारत का पहला मोबाइल 'लिक्विड ट्री' विकसित
दिलीप
- 07 Jul 2026, 03:38 PM
- Updated: 03:38 PM
धनबाद, सात जुलाई (भाषा) सीएसआईआर-सीआईएमएफआर के शोधकर्ताओं ने भारत का पहला मोबाइल 'स्मार्ट एल्गल लिक्विड ट्री' (एसएएलटी) तैयार करने का दावा किया है। यह एक छोटा वायु-शोधन प्रणाली है, जो कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने और ऑक्सीजन छोड़ने के लिए सूक्ष्म शैवाल का उपयोग करती है। यह उन प्रदूषित शहरी क्षेत्रों के लिए एक व्यावहारिक समाधान प्रदान करता है, जहां पारंपरिक पेड़ लगाना मुश्किल होता है।
असल पेड़ से अलग, यह उपकरण एक बंद यूनिट के अंदर पानी में सूक्ष्म शैवाल को रखता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के जरिए ये शैवाल आसपास की हवा से लगातार कार्बन डाइऑक्साइड को सोखते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता बेहतर होती है।
इस परियोजना का नेतृत्व करने वालीं सीआईएमएफआर की वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक वेट्रिवेल अंगुसेलवी ने मंगलवार को 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "इस नवाचार का प्राथमिक उद्देश्य घनी आबादी वाले और कम जगह वाले उन शहरी क्षेत्रों में खराब वायु गुणवत्ता से निपटना है, जहां बड़े पेड़ लगाने के लिए बहुत कम या बिल्कुल जगह नहीं होती है।"
उन्होंने बताया कि पेटेंट कराई जा चुकी इस प्रौद्योगिकी को धनबाद स्थित सीएसआईआर-केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (सीआईएमएफआर) परिसर और मध्य प्रदेश के सिंगरौली स्थित नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) में लगाया जा चुका है, जहां इसके नतीजे उत्साहजनक रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कार्बन डाइऑक्साइड कम करने के अलावा यह प्रणाली धूल को घटाने में भी मदद करती है और प्राकृतिक या कृत्रिम रोशनी की मदद से चौबीसों घंटे काम कर सकती है। इसमें ऐसे सेंसर लगाए गए हैं, जो हवा की गुणवत्ता, कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर, तापमान, नमी और हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों की जानकारी दिखाते हैं।
सौर ऊर्जा और बिजली दोनों से चलने वाली यह मोबाइल यूनिट एक सार्वजनिक सुविधा के रूप में भी काम करती है। इसमें चार से आठ लोगों के बैठने के लिए छायादार जगह और मोबाइल फोन व लैपटॉप चार्ज करने की सुविधा भी दी गई है।
अंगुसेल्वी के अनुसार, इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल औद्योगिक क्षेत्रों के साथ-साथ स्कूलों, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, शॉपिंग मॉल, पार्क और थिएटर जैसे सार्वजनिक स्थानों पर किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि सामान्य पेड़ों के विपरीत शैवाल आधारित इस प्रणाली के लिये मिट्टी की जरूरत नहीं है। यह शहरी प्रदूषण और कीटों से भी कम प्रभावित होती है और इसके रखरखाव की जरूरत भी बहुत कम होती है।
सीआईएमएफआर के अधिकारियों ने कहा कि इस उपकरण के व्यावसायिक उत्पादन के लिए बातचीत चल रही है, और इसे किफायती कीमत पर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि इसका उपयोग उन घरों और इलाकों में भी किया जा सके, जो गंभीर वायु प्रदूषण का सामना कर रहे हैं।
भाषा तान्या दिलीप
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