दिल्ली दंगा 2020: अदालत ने यूएपीए मामले में अतहर खान की जमानत याचिका खारिज की
माधव
- 07 Jul 2026, 05:31 PM
- Updated: 05:31 PM
नयी दिल्ली, सात जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने वर्ष 2020 में राजधानी के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में हुए दंगों के पीछे कथित 'बड़ी साजिश' को लेकर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत दर्ज मामले में गिरफ्तार अतहर खान को जमानत देने से मंगलवार को इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने अधीनस्थ न्यायालय के 29 जनवरी को इस मामले में राहत देने से इनकार करने के आदेश को चुनौती देने वाली अतहर की अपील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह ''दंगों के दौरान हत्या कराने की साजिश रचने वाले मुख्य षड्यंत्रकर्ताओं में से एक'' था, न कि ''केवल स्थानीय स्तर का कोई गुर्गा''।
अतहर का पक्ष रहे अधिवक्ता ने अपने मुवक्किल के लिए इस आधार पर जमानत देने का अनुरोध किया कि वह महज ''स्थानीय स्तर का मददगार'' था और छह साल से हिरासत में है, और इसी तरह के मामलों में शामिल अन्य सह-आरोपियों को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।
पीठ ने सह-आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय के निष्कर्षों का संज्ञान लेते हुए कहा कि अतहर की भूमिका उन लोगों से '' स्पष्ट तौर पर अलग'' थी जिन्हें शीर्ष अदालत से राहत मिली है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि एक सुरक्षित गवाह के बयान समेत जो सामग्री मिली है, उससे पता चलता है कि जहां व्हट्सऐप ग्रुप में बातचीत के दौरान शामिल दूसरे लोग शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का सुझाव दे रहे थे, वहीं अतहर ''हिंसक विरोध प्रदर्शन करने के अपने मंसूबे पर अड़ा था, यहां तक कि उसने जान लेने तक की हद तक जाने की बात की''।
पीठ ने कहा, ''इसलिए, इन दंगों के दौरान हुई मौतों को महज एक संयोग नहीं माना जा सकता... टीम के साथियों के बार-बार हिंसा न करने के लिए कहने के बावजूद, अपीलकर्ता ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया।''
अदालत ने अपने जमानत अर्जी खारिज करने के फैसले में टिप्पणी की, '' इसलिए, अपीलकर्ता को सिर्फ स्थानीय स्तर का मददगार नहीं माना जा सकता, बल्कि उसे दंगों के दौरान हत्या कराने की साजिश रचने वाले मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक माना जाएगा।''
पीठ की राय थी कि चूंकि निजी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लोगों की हत्या का कारण बनने में अतहर की भूमिका प्रथम दृष्टया साबित हो गई है, इसलिए उसका मामला गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) 1967 की धारा 43डी(5) के तहत जमानत के कड़े मानदंडों पर खरा नहीं उतरा।
उच्च न्यायालय ने कहा कि अतहर के भागने का भी खतरा है और इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह उन गवाहों को गलत तरीके से प्रभावित कर सकता है, जिनकी गवाही अभी दर्ज की जानी बाकी है।
पीठ ने कहा, ''इस तरह, भले ही जमानत की सामान्य शर्तें लागू की जाएं, फिर भी इस मामले में अपीलकर्ता की भूमिका और गवाहों को सुरक्षा के मद्देनजर वह जमानत का हकदार नहीं है। यह अदालत अपीलकर्ता को जमानत देने के पक्ष में नहीं है।''
अदालत ने कहा, ''इसलिए, चुनौती दिये गए आदेश को बरकरार रखा जाता है और अपील खारिज की जाती है।''
कॉल सेंटर के पूर्व कर्मचारी अतहर पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग में हुए विरोध-प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों में से एक होने और वहां भड़काऊ भाषण देने का आरोप है।
दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ के अनुसार, अतहर ने गुप्त बैठकों में कथित तौर पर हिस्सा लिया था, जिनमें उसने कहा था कि 'दिल्ली को जलाने का समय आ गया है' और उस पर सीसीटीवी कैमरों को नष्ट करने की साजिश में शामिल होने का भी आरोप है।
फरवरी 2020 के दंगों का 'मुख्य साजिशकर्ता' होने के आरोप में अतहर खान के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसे जुलाई 2020 में गिरफ्तार किया गया।
इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
इस कथित बड़ी साजिश के मामले में शरजील इमाम, खालिद सैफी और उमर खालिद समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था।
इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस का विशेष प्रकोष्ठ कर रहा है।
भाषा धीरज माधव
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