असम मंत्रिमंडल ने बजट सत्र में पेश किए जाने वाले सात विधेयकों को मंजूरी दी
सुभाष
- 06 Jul 2026, 01:01 AM
- Updated: 01:01 AM
गुवाहाटी, पांच जुलाई (भाषा) असम मंत्रिमंडल ने रविवार को 'कारोबार की सुगमता' और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) इकाइयों की स्थापना को सुगम बनाने से जुड़े विधेयक सहित सात विधेयकों को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने पुलिस द्वारा संचालित एकीकृत आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली तथा अमूल की नयी डेरी अवसंरचना परियोजना को भी मंजूरी दी है।
राज्य विधानसभा का बजट सत्र सोमवार से शुरू होगा।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में शर्मा ने बताया कि स्वीकृत विधेयकों में असम भूमि एवं राजस्व विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 भी शामिल है। इसके तहत बरपेटा, बटाद्रवा और माजुली में धार्मिक स्थलों तथा अन्य प्रतिष्ठित संरचनाओं के आसपास की भूमि केवल उन लोगों को बेची जा सकेगी, जिनके परिवार पिछले तीन पीढ़ियों से इन क्षेत्रों में रह रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''इस विधेयक को विधानसभा पहले ही पारित कर चुकी थी, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजे जाने पर केंद्र सरकार ने इसे और मजबूत बनाने के लिए कुछ सुझाव दिए थे। उन्हें शामिल कर संशोधित विधेयक फिर से पेश किया जाएगा।''
मुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल ने असम कारोबार की सुगमता (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी है।
इसके अलावा असम सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (स्थापना एवं संचालन सुविधा) विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी गई है। इसके तहत गैर-प्रदूषणकारी क्षेत्रों में एमएसएमई इकाइयों को पहले तीन वर्षों तक पूर्व सरकारी अनुमति के बिना स्थापित किया जा सकेगा।
मंत्रिमंडल ने असम पर्यटन (विकास एवं पंजीकरण) (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी स्वीकृति दी, जिसमें होमस्टे, होटल और अन्य पर्यटन प्रतिष्ठानों के पंजीकरण से संबंधित प्रावधान हैं।
शर्मा ने बताया कि औपनिवेशिक काल के 'सराय अधिनियम' को निरस्त किया जाएगा और उसके प्रावधान नए विधेयक में शामिल किए गए हैं।
बैठक में असम जन विश्वास विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी गई। इसके तहत नगर एवं ग्राम नियोजन नियमों तथा भूमि पुनर्वर्गीकरण से जुड़े कुछ प्रावधानों में ढील दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्रिमंडल ने गुवाहाटी सैटेलाइट सिटी विकास प्राधिकरण विधेयक, 2026 को भी मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि इससे इस परियोजना को निजी कंपनियों को सौंपे जाने संबंधी अटकलों पर विराम लगेगा।
उन्होंने कहा, ''कई लोग कह रहे थे कि सैटेलाइट सिटी के नाम पर जमीन अदाणी और अंबानी समूह को दी जाएगी। अब सभी को स्पष्ट हो जाएगा कि इसका विकास सरकार स्वयं करेगी।''
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