गृह मंत्रालय ने राममंदिर ट्रस्ट से जुड़े रिकार्ड को 'गोपनीय' श्रेणी में रखा, सीआईसी ने इसे सही माना
पवनेश
- 03 Jul 2026, 09:13 PM
- Updated: 09:13 PM
नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्रालय ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनाने से जुड़ी सरकारी मंजूरी वाली योजना और उससे संबंधित आदेश को 'गोपनीय' श्रेणी में रखा था और केंद्रीय सूचना आयोग ने भी 2024 के एक आदेश में आरटीआई अधिनियम के तहत संबंधित दस्तावेज नहीं मुहैया कराने के फैसले को सही करार दिया था।
आयोग ने मंत्रालय की इस दलील को स्वीकार किया था कि इनके खुलासे से संबंधित लोगों की जान को खतरा हो सकता है।
यह मामला नीरज शर्मा की ओर से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत दाखिल अर्जी से जुड़ा है। उन्होंने ''श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से जुड़ी अधिसूचना संख्या सीजी-डीएल-ई-05022020-215935 में उल्लेखित व केंद्र सरकार द्वारा पांच फरवरी 2020 के आदेश संख्या 71011/02/2019-एवाई के जरिए मंज़ूर की गई ''योजना की सत्यापित प्रति'' और उससे जुड़े सरकारी आदेश मुहैया कराने का अनुरोध किया था।
केंद्रीय गृह मंत्रालय से संतोषजनक जवाब न मिलने पर, शर्मा ने अपनी अपील के साथ आयोग का रुख किया। आयोग में 18 जून, 2024 को हुई सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय ने कहा कि ''योजना और उससे जुड़े सभी मामलों की संवेदनशीलता को देखते हुए, 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' के गठन से जुड़े सभी दस्तावेज़ आदि के पूरे संग्रह को गोपनीय श्रेणी में रखा गया है''।
सरकार द्वारा पांच फरवरी, 2020 को जारी एक अधिसूचना में कहा गया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार केंद्र ने इस योजना को मंज़ूरी दी।
इसमें कहा गया, ''...इस योजना में ट्रस्ट के कामकाज के लिए जरूरी प्रावधान किए गए हैं, जिनमें ट्रस्ट का प्रबंधन, न्यासियों के अधिकार, मंदिर का निर्माण और उससे जुड़े सभी ज़रूरी, आनुषंगिक और पूरक मामले शामिल हैं।''
सुनवाई के दौरान, मंत्रालय ने दलील दी कि ''चूंकि मांगी गई जानकारी गोपनीय और संवेदनशील है, इसलिए इसे उजागर करने से संबंधित व्यक्तियों की जान को खतरा हो सकता है।''इसी वजह से सूचना का अधिकार (आरटीआई)अधिनियम की धारा 8(1)(जी) के तहत जानकारी देने से इनकार किया गया।
गृह मंत्रालय ने यह भी कहा कि ट्रस्ट ''अपने आप में एक स्वतंत्र और स्वायत्त संगठन/संस्था है, जिसमें केंद्र या राज्य सरकार का कोई वित्तीय, प्रशासनिक या अन्य हस्तक्षेप नहीं है'' और केंद्र सरकार उच्चतम न्यायालय के अयोध्या फैसले के पालन में केवल ट्रस्ट की अवस्थापक बनी।
मंत्रालय की दलीलों को स्वीकार करते हुए तत्कालीन मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल सामरिया ने टिप्पणी की कि ''सूचना अधिकारी ने उचित जवाब दे दिया है और इस मामले में आयोग के और दखल की ज़रूरत नहीं है'', जिसके बाद 18 जून, 2024 को अपील का निस्तारण कर दिया गया।
पिछले साल चार जून को जारी एक अलग आदेश में सीआईसी ने इस विषय पर विचार किया कि क्या श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आरटीआई अधिनियम की धारा 2(एच) के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण की अर्हता रखता है या नहीं।
गृह मंत्रालय ने कहा कि यह ''एक स्वतंत्र ट्रस्ट'' है, जिसका ''न तो सरकार के पास मालिकाना हक है, न ही सरकार इसे नियंत्रित करती है या कोष देती है। न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार ने इसे कोई धन दिया है, और सरकार की भूमिका केवल ट्रस्ट के गठन तक ही सीमित थी,'' जो उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार किया गया था।
ट्रस्ट ने अपने वकील के ज़रिए दलील दी कि इसे ''सरकार की किसी अधिसूचना के जरिए न तो स्थापित किया गया है और न ही गठित किया गया है'', इसे सरकार से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई धन नहीं मिलता है और इसलिए, यह आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2(एच) के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है''।
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि ट्रस्ट ''उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार बनाया गया था'' और यह ''ट्रस्ट विलेख के ज़रिए बनाया गया''।
आयोग ने कहा कि ट्रस्ट ''न तो सरकार की किसी अधिसूचना से स्थापित या गठित किया गया था और न कि केंद्र सरकार द्वारा स्वतः शुरू की गई पहल थी बल्कि इसका गठन उच्चतम न्यायालय के निर्देश के अनुपालना में की गई थी।''
सीआईसी ने कहा ''आयोग का मानना है कि इस बात को बिना किसी शक के साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है कि ट्रस्ट किसी ऐसी संस्था के मालिकाना हक या नियंत्रण में है, या उसे बड़े पैमाने पर धन मिलता है, या किसी गैर-सरकारी संगठन को संबंधित सरकार से सीधे या परोक्ष रूप से बड़े पैमाने पर धन मिलता है। इसलिए ट्रस्ट को सार्वजनिक प्राधिकरण'का दर्जा नहीं दिया जा सकता।''
इसमें कहा गया है कि ट्रस्ट ''एक स्वतंत्र संस्था'' है, जिसे न तो केंद्र सरकार और न ही राज्य सरकार से कोई आर्थिक मदद या प्रशासनिक नियंत्रण मिलता है, और इसलिए यह आरटीआई अधिनियम के दायरे में नहीं आएगा।
भाषा धीरज पवनेश
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