आर्लेकर की वैगई समीक्षा बैठक से राज्य प्रशासन में राज्यपाल की भूमिका को लेकर विवाद
सुरेश
- 03 Jul 2026, 09:09 PM
- Updated: 09:09 PM
चेन्नई, तीन जुलाई (भाषा) तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करने और यह टिप्पणी करने से राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया कि यदि वैगई नदी का पुनरुद्धार नहीं किया गया तो 'लोक भवन' हस्तक्षेप करेगा।
राज्य के ऊर्जा संसाधन मंत्री आर. निर्मल कुमार ने राज्यपाल की इस समीक्षा बैठक पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राज्यपालों के पास सरकारी या प्रशासनिक कार्यों का निरीक्षण करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है और यह कदम "हस्तक्षेप" के समान है।
कुमार ने मदुरै में अधिकारियों की बैठक में कहा, "जनता द्वारा चुनी गई सरकार ऐसी किसी भी कार्रवाई की अनुमति नहीं देगी। राज्य प्रशासन या निरीक्षण में राज्यपाल के किसी भी अनावश्यक हस्तक्षेप की कड़ी निंदा की जाएगी।''
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राज्य सरकार की पूर्व अनुमति के बिना इस तरह के निरीक्षण में राज्यपाल के साथ ना तो सहयोग करें और ना ही सहायता करें।
मंत्री ने दावा किया, ''राज्यपाल की इस तरह की कार्रवाई अनावश्यक भ्रम पैदा करती है और उनके संवैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर है।''
इससे पहले दो जुलाई को मदुरै दौरे के दौरान राज्यपाल आर्लेकर ने वैगई नदी की बदहाल स्थिति पर आश्चर्य जताया था और कहा था कि मदुरै के युवाओं को इसके पुनरुद्धार को एक मिशन के रूप में लेना चाहिए। उन्होंने कहा था कि नदी का पुनरुद्धार करना देशभक्ति है।
राज्यपाल ने मदुरै के एक कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था, ''देशभक्ति साबित करने के लिए हथियार उठाकर युद्ध करना जरूरी नहीं है। यदि कोई यह पहल नहीं करता है, तो 'लोक भवन' हस्तक्षेप करेगा।''
एक सूत्र ने बताया कि बाद में राज्यपाल ने मदुरै में जिला अधिकारियों के साथ एक घंटे से अधिक समय तक समीक्षा बैठक की थी।
राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री वन्नी अरासु ने भी राज्यपाल की आलोचना करते हुए उनपर निर्वाचित सरकार के ''कार्यों में हस्तक्षेप" करने और तमिलनाडु से जुड़े मुद्दों पर "चुनिंदा तरीके से चुप्पी साधने" का आरोप लगाया।
मेकेदातू बांध विवाद का हवाला देते हुए वन्नी अरासु ने सवाल किया कि क्या आर्लेकर कावेरी नदी पर कर्नाटक सरकार द्वारा प्रस्तावित संतुलन जलाशय के निर्माण का विरोध करने के तमिलनाडु के रुख का समर्थन करेंगे।
यह परियोजना बेंगलुरु की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ जलविद्युत उत्पादन के लिए प्रस्तावित है। उन्होंने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि राज्यपाल उन मुद्दों पर चुप रहे जो सीधे राज्य, जनता की आजीविका और अधिकारों को प्रभावित करते हैं, लेकिन ऐसे मामलों पर टिप्पणी कर रहे हैं, जो उनके संवैधानिक दायरे से संबंधित नहीं हैं।
वन्नी अरासु ने कहा, "कावेरी मुद्दे पर राज्य के अधिकारों की रक्षा, वैगई नदी का पुनरुद्धार और थामिराबरानी नदी का संरक्षण जैसे मुद्दों की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की है, जो इसे संभालने में सक्षम हैं।"
विपक्ष के नेता और द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) नेता उदयनिधि स्टालिन ने राज्यपाल की कार्रवाई को "अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर किया गया हस्तक्षेप'' बताया, जो राज्य के अधिकारों और संवैधानिक सीमाओं का उल्लंघन है।
उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट में आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ टीवीके सरकार राज्य के अधिकारों से समझौता कर रही है, क्योंकि उसने इस तरह के निरीक्षण की अनुमति दी।
कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने भी 'एक्स' पर कहा कि राज्यपाल को समझना चाहिए कि निर्वाचित सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप करना "गलत" है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता के. बालकृष्णन ने भी आर्लेकर की आलोचना करते हुए कहा कि राज्यपालों को समीक्षा करने का अधिकार नहीं है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता डॉ. तमिलिसाई सौंदरराजन ने राज्यपाल का बचाव करते हुए कहा कि जन-कल्याण के संदेश के लिए उन्हें बेवजह निशाना बनाया जा रहा है और दावा किया कि पर्यावरण को लेकर राज्यपाल की चिंता के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं था। उन्होंने कहा कि आलोचना "दुर्भाग्यपूर्ण" है और राज्यपाल केवल जनहित का मुद्दा उठा रहे हैं।
उन्होंने माकपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को इस बात पर आत्म-मंथन करना चाहिए कि कूवम और वैगई, दोनों नदियां इतने लंबे समय से प्रदूषित क्यों बनी हुई हैं।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने कहा कि राज्यपाल ने वैगई नदी की दयनीय स्थिति पर सही चिंता जताई और इसे युवाओं के लिए देशभक्ति से जोड़कर एक रचनात्मक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का उद्देश्य पर्यावरण और जनकल्याण है, न कि राजनीति और उन्हें निशाना बनाना अनुचित है।
भाजपा नेता ने कहा कि पर्यावरण और जनकल्याण के प्रति इस चिंता का स्वागत करने के बजाय, कुमार ने राज्यपाल पर हमला करने का चयन किया और दावा किया कि उनके (राज्यपाल के) पास सरकारी योजनाओं की समीक्षा करने या ऐसे मुद्दों को उठाने का "कोई अधिकार" नहीं है।
भाषा अमित सुरेश
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