भगीरथ चौधरी का मामला खुली लूट का है: कांग्रेस
नेत्रपाल
- 27 Jun 2026, 10:35 PM
- Updated: 10:35 PM
नयी दिल्ली, 27 जून (भाषा) कांग्रेस ने केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी को उनके ही मंत्रालय की योजना के तहत उन्हीं की व्यवसायिक खेती के लिए 99 लाख रुपये की सब्सिडी मिलने संबंधी रिपोर्ट सामने आने के बाद शनिवार को कहा कि यह ''खुली लूट'' और हितों के टकराव का मामला है।
पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए सब्सिडी की शुरुआत घर से होती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में मंत्री स्वयं आवेदक, मंजूरी देने वाले प्राधिकारी और लाभार्थी भी हैं।
खेड़ा ने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, '' 'चंदा-चोर' आरएसएस-भाजपा के भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहिष्णुता के दावों को एक और झटका देते हुए 'इंडियन एक्सप्रेस' ने खबर दी है कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी ने अपने ही मंत्रालय द्वारा संचालित एक योजना के तहत अपनी वाणिज्यिक खीरा खेती परियोजना के लिए 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी मंजूर करवाई है।''
उन्होंने आरोप लगाया, ''वह आवेदक भी हैं, मंजूरी देने वाले प्राधिकारी भी और लाभार्थी भी। इसे हितों का टकराव कहना भी कम होगा। यह खुली लूट है।''
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि गरीबों से अपेक्षा की जाती है कि वे पांच किलोग्राम मुफ्त राशन और अपने बच्चों के लिए मामूली मध्याह्न भोजन को सरकार का एहसान समझकर उसके प्रति कृतज्ञ रहें, जबकि यह उनका अधिकार है।
उन्होंने कहा, ''वहीं, दूसरी ओर मंत्री और उनके परिजन सरकारी खजाने को अपनी जागीर समझते हुए सब्सिडी हासिल कर रहे हैं, लाभ उठा रहे हैं और सार्वजनिक धन को अपने पिता की संपत्ति की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।''
खेड़ा ने कहा, ''जब बाड़ ही खेत को खाने लगे, तो फ़सल कैसे बचेगी?''
वहीं, केंद्रीय मंत्री का बचाव करते हुए भाजपा की राजस्थान इकाई के अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा, ''विपक्ष का आरोप पूरी तरह गलत है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) ने सब्सिडी दी है, जिसके भगीरथ चौधरी सदस्य नहीं हैं... विपक्ष में जिसने भी यह आरोप लगाया है, उसने अज्ञानता के कारण ऐसा किया है।''
'इंडियन एक्सप्रेस' की खबर में कहा गया है कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी को उनके मंत्रालय द्वारा संचालित एक योजना के तहत वाणिज्यिक खीरा खेती परियोजना के लिए 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी मिली है।
हालांकि, अंतिम मंजूरी राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की परियोजना अनुमोदन समिति ने दी, जिसमें मंत्री शामिल नहीं हैं, लेकिन चौधरी एनएचबी के उस बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष हैं, जो इसके कामकाज की निगरानी करता है।
भाषा हक नेत्रपाल
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