प्राकृतिक खेती एक स्वस्थ समाज की नींव रख सकती है : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
शफीक
- 18 Jun 2026, 10:47 PM
- Updated: 10:47 PM
कानपुर, 18 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्राकृतिक खेती एक स्वस्थ समाज की नींव रख सकती है, क्योंकि इससे रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण होने वाली बीमारियों से बचाव में मदद मिल सकती है।
योगी कानपुर में आयोजित 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला 2026' को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया।
योगी ने कहा कि 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण के लक्ष्यों में बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करना और बीमारियों का खतरा घटाना शामिल है, जिसमें प्राकृतिक खेती अहम भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने कहा कि रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण किडनी से संबंधित बीमारियों सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि हुई है।
योगी ने कहा, "30 साल पहले किडनी रोग के मामले बहुत कम थे। आज हर इलाके में दो या तीन किडनी रोगी मिल सकते हैं। कुछ डायलिसिस पर हैं और कुछ को प्रत्यारोपण की आवश्यकता है।"
उन्होंने कहा कि लिवर सिरोसिस के मामलों के अलावा उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने गोरक्षा के महत्व पर भी यह कहते हुए जोर दिया कि कई लोग गाय का दूध पीते हैं, लेकिन बाद में गायों को सड़कों पर छोड़ देते हैं और जब ये आवारा पशु, फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं तो वही लोग सरकार पर आरोप लगाते हैं।
गोरक्षा को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए आदित्यनाथ ने कहा कि यह इस राज्य का संकल्प और भारत के सांस्कृतिक मूल्यों का हिस्सा भी है कि गायों को कटने नहीं दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, ''हम किसी को भी इस देश की सुरक्षा के साथ समझौता करने नहीं देंगे। सनातन धर्म को मानने वालों के लिए गाय पवित्र है और इसे परिवार का सदस्य माना जाता है।''
इस बीच, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आवारा पशु को लेकर आदित्यनाथ के बयान पर निशाना साधा।
यादव ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''जिन्होंने 14 दिनों में आवारा पशुओं की समस्या हल करने का वादा किया, उनसे यह बयान सुनने को मिल रहा है। उनका चुनावों से पहले ही सफाया हो सकता है। यदि अपने शब्दों का नहीं तो कम से कम अपने वरिष्ठों के शब्दों का सम्मान करना चाहिए।"
उन्होंने लिखा, "याद रखिए, दिल्ली से किसी की नियुक्ति करने के लिए ही पर्ची जारी नहीं की जाती, बल्कि इस तरह की पर्ची से पूरी कैबिनेट बदल सकती है।"
यादव ने सरकार द्वारा इस मुद्दे से निपटने को लेकर यह कहते हुए सवाल किया कि यदि पूरी समस्या के लिए जनता जिम्मेदार है तो समाधान निकालने का वादा क्यों किया गया था।
योगी ने रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए गाय आधारित प्राकृतिक खेती की वकालत की, जिसमें गाय के गोबर और मूत्र का इस्तेमाल खाद और कीटनाशकों के रूप में किया जाता है।
उन्होंने कहा कि किसान प्राकृतिक खेती को अपनाकर प्रति एकड़ लगभग 10,000-12,000 रुपये बचा सकते हैं, बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं और स्वास्थ्य देखभाल खर्च में भी कमी ला सकते हैं।
योगी ने बताया कि राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए गंगा किनारे के 27 जिलों और बुंदेलखंड के सात जिलों की पहचान की है, जबकि 24 जिले पहले ही इस दिशा में प्रगति कर चुके हैं।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक कृषि उत्पादों के प्रमाणीकरण को सरल बनाने, बाजार विकसित करने और ऐसी उपज के लिए बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
योगी ने कहा, "अगर उर्वरकों और कीटनाशकों के इस्तेमाल से तैयार उपज 40 रुपये में उपलब्ध है और प्राकृतिक खेती से पैदा चीजें 50 रुपये में मिलती हैं, तो लोगों को बाद वाले उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि ये हानिकारक रसायनों से मुक्त हैं और जीवन की गुणवत्ता के लिहाज से भी बेहतर हैं।"
मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में विशिष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित किया। उन्होंने मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण सहित अन्य योजनाओं के लाभार्थियों को मदद राशि के चेक भी बांटे।
राज्य सरकार द्वारा किए गए उपायों को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे उत्तर प्रदेश में 7,700 से अधिक गो आश्रय स्थलों पर 14 लाख से अधिक गायों की देखभाल की जा रही है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत एक पशु की देखभाल के लिए प्रतिमाह 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है और इस योजना से करीब 1.5 लाख किसान लाभान्वित हो रहे हैं।
भाषा जफर राजेंद्र पारुल शफीक
शफीक
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