केंद्र सरकार ने दिल्ली में जयपुर पोलो ग्राउंड का कब्जा लिया
नेत्रपाल
- 13 Jun 2026, 03:07 PM
- Updated: 03:07 PM
नयी दिल्ली, 13 जून (भाषा) केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) के अधिकारियों ने शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी के रेस कोर्स क्षेत्र स्थित 15.20 एकड़ के जयपुर पोलो ग्राउंड का कब्जा ले लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
यह कार्रवाई 20 मई को जारी किए गए बेदखली आदेश के बाद की गई है, जिसके तहत एलएंडडीओ ने इस भूमि पर कब्जा मांगा था। कार्यालय ने इसके लिए तर्क दिया था कि यह भूमि ''वृहद सार्वजनिक उद्देश्य और जनहित'' के लिए आवश्यक है।
हालांकि, आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि इस भूमि का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा।
आठ जून को दिल्ली उच्च न्यायालय ने इंडियन पोलो एसोसिएशन (आईपीए) की बेदखली नोटिस पर रोक लगाने के अनुरोध वाली याचिका पर निर्णय लेने के लिए एक जिला अदालत को निर्देश दिया था। हालांकि, जिला अदालत ने इस आदेश के खिलाफ अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
आईपीए ने इस बेदखली कार्रवाई को ''गलत, मनमाना और कानून के विपरीत'' बताते हुए कहा कि वह अपने अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी कानूनी उपायों का सहारा लेगी।
आईपीए के वकील मेजर (सेवानिवृत्त) निर्विकार सिंह ने कहा, ''चूंकि मामला न्यायालय के विचाराधीन है और इसकी सुनवाई जारी है, इसलिए एसोसिएशन इस समय इस पर कोई और टिप्पणी नहीं करना चाहती।''
एलएंडडीओ ने रेस कोर्स क्लब और जिमखाना क्लब को भी बेदखली आदेश जारी किए थे। कार्यालय का कहना था कि इन परिसरों की आवश्यकता बड़े सार्वजनिक उद्देश्य के लिए है।
दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों को राहत देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने 26 मई को केंद्र सरकार के इस आश्वासन का संज्ञान लिया था कि वह पांच जून तक औपनिवेशिक काल के इस क्लब का जबरन कब्जा नहीं लेगी। इसके बाद अदालत ने कहा कि इस चरण में किसी अंतरिम आदेश की आवश्यकता नहीं है।
न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन ने लुटियंस दिल्ली में स्थित जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ भूमि का स्थायी पट्टा समाप्त करने के केंद्र सरकार के निर्णय में हस्तक्षेप करने से भी इनकार कर दिया और मामले की अगली सुनवाई जुलाई के अंत में निर्धारित की।
इस कार्यवाही के कारण जिमखाना क्लब के सदस्यों को तब तक राहत मिल गई है। उस समय तक केंद्र सरकार अपना जवाब दाखिल करेगी।
पिछले महीने दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली रेस क्लब को जारी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगाने वाले आदेश को भी रद्द कर दिया था। यह नोटिस लुटियंस दिल्ली स्थित क्लब की 84 एकड़ भूमि से प्रस्तावित बेदखली के संबंध में जारी किया गया था।
भाषा गोला नेत्रपाल
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