विज्ञान का अर्थ लोक कल्याण, भारत की ताकत कृषि और एमएसएमई क्षेत्रों में निहित है:योगी आदित्यनाथ
संतोष
- 13 Jun 2026, 03:10 PM
- Updated: 03:10 PM
वाराणसी (उप्र), 13 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि विज्ञान लोक कल्याण के लिए है और जिन देशों ने वैज्ञानिक सोच और नवाचार को अपनाया है, उन्होंने प्रगति की है।
आदित्यनाथ ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन किया।
उन्होंने अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की असली ताकत कृषि और 'सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम' (एमएसएमई) क्षेत्रों में निहित है।
उन्होंने कहा, ''विज्ञान का अर्थ लोक कल्याण है। जिन देशों ने विज्ञान को अपनाया उन्होंने प्रगति की है।''
मुख्यमंत्री ने किसानों से जैविक और शून्य बजट प्राकृतिक खेती को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कृषि में रसायनों के अत्यधिक उपयोग के हानिकारक प्रभावों के प्रति किसानों को आगाह किया।
उन्होंने कहा कि कृषि कभी भी घाटे का पेशा नहीं रही, जब किसान स्वयं नवाचार करते थे और पारंपरिक तरीकों को अपनाते थे।
व्यापारियों और उद्यमियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, आदित्यनाथ ने कहा कि वे देश को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र में वर्तमान में लगभग 96 लाख इकाइयां हैं, जो लगभग तीन करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करती हैं।
मुख्यमंत्री ने भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान पर भी प्रकाश डाला और अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा, ''ज्ञान जहां से भी आए, उसका स्वागत किया जाना चाहिए।''
बाद में योगी आदित्यनाथ ने करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से बीएचयू में बन रहे 'नेशनल सेंटर फॉर एजिंग' का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को उच्च गुणवत्ता मानकों को बनाए रखते हुए 200 बिस्तरों वाले सात मंजिला इस सुविधा केंद्र को समय पर पूरा करने का निर्देश दिया।
यह केंद्र देश में तीसरा ऐसा सुविधा केंद्र होगा। यह केंद्र बुजुर्गों की स्वास्थ्य देखभाल से संबंधित उपचार और अनुसंधान के लिए उत्तर भारत का एक प्रमुख केंद्र होगा।
इस सुविधा केंद्र में 'मेमोरी क्लिनिक', गठिया क्लिनिक, वृद्ध व्यक्तियों के लिए बहिरंग विभाग, गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू), मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और पुनर्वास सेवाओं सहित आधुनिक सेवाएं होंगी।
भाषा सं जफर नेत्रपाल संतोष
संतोष
1306 1510 वाराणसी