पुलिस अधिकारी रोज़ाना दो घंटे का समय जन शिकायत निवारण को दें : डीजीपी गुजरात
माधव
- 11 Jun 2026, 10:36 PM
- Updated: 10:36 PM
गांधीनगर, 11 जून (भाषा) गुजरात के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जीएस मलिक ने बृहस्पतिवार को प्रत्येक स्तर के पुलिस अधिकारियों के लिए रोजाना अपने दफ्तर में दो घंटे अनिवार्य रूप से जन शिकायत सुनवाई और समाधान करने का आदेश दिया।
डीजीपी ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी किया है।
पुलिस प्रमुख ने यह भी आदेश दिया कि आम शिकायतों का निपटारा ज़्यादा से ज़्यादा 15 दिनों के भीतर किया जाए, जबकि आर्थिक अपराधों, वैवाहिक और पारिवारिक विवादों, इलाज में लापरवाही और भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों का निपटारा छह हफ्तों के भीतर किया जाना चाहिए।
भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) की 1993 बैच के अधिकारी मलिक ने सोमवार को राज्य के डीजीपी का पदभार ग्रहण किया।
डीजीपी द्वारा जारी आदेश के अनुसार पुलिस आयुक्त, पुलिस अधीक्षक, संयुक्त, अपर, उप और सहायक पुलिस आयुक्त सहित सभी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को हर दिन दोपहर 12 बजे से दो बजे तक अपने कार्यालय में मौजूद रहना होगा। उन्हें नागरिकों से मिलना होगा, उनकी शिकायतें सुननी होंगी और लिखित आवेदनों पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू करनी होगी।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक इस निर्देश का उद्देश्य पुलिसिंग को ज़्यादा नागरिक-केंद्रित बनाना और एक मज़बूत व्यवस्था कायम करना है, ताकि नागरिकों को अपनी शिकायतों के समाधान या न्याय पाने के लिए गांधीनगर में डीजीपी कार्यालय या सचिवालय न जाना पड़े।
आदेश में कहा गया है कि अगर कोई ऐसी स्थिति आ जाए जिसे टाला न जा सके और संबंधित अधिकारी मौजूद न रह पाए, तो सबसे वरिष्ठ अधिकारी या ऑफिस रीडर आवेदकों की बात सुनेंगे और उसे प्राथमिकता के आधार पर संबंधित अधिकारी तक पहुंचाएंगे।
पुलिस निरीक्षकों के लिए निवासियों से मिलने का एक अलग समय तय किया गया है, क्योंकि वे सुबह के समय अदालत के कामों, जांच-पड़ताल और हलफनामे से जुड़े कामों में व्यस्त रहते हैं।
विज्ञप्ति के मुतबिक, ''संबंधित पुलिस थानों के प्रभारी निरीक्षकों को निर्देश दिया जाता है कि हर दिन शाम 4 बजे से 6 बजे तक अपने-अपने पुलिस थानों में मौजूद रहें और लोगों से व्यक्तिगत रूप से मिलें। उन्हें नागरिकों की शिकायतें सुननी होंगी, लिखित आवेदन लेने होंगे और तुरंत कानूनी कार्रवाई शुरू करनी होगी, ताकि आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए ऊंचे दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।''
भाषा धीरज माधव
माधव
1106 2236 गांधीनगर