ओडिशा पुलिस ने मुख्यमंत्री कार्यालय से गायब रिपोर्टों की जांच शुरू की, भाजपा ने साजिश का आरोप लगाया
खारी
- 11 Jun 2026, 11:02 PM
- Updated: 11:02 PM
भुवनेश्वर, 11 जून (भाषा) ओडिशा पुलिस ने तेज होते राजनीतिक विवाद के बीच बृहस्पतिवार को पूर्ववर्ती बीजू जनता दल (बीजद) सरकार के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय (सीओएम) से जांच आयोगों की दो रिपोर्टों के कथित रूप से गायब होने के मामले में जांच शुरू की है। इन रिपोर्टों का संबंध अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 65 लोगों की मौत से है।
राज्य सरकार द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की जिसमें आरोप लगाया गया है कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या और उसके बाद 2008 में कंधमाल जिले में हुए सांप्रदायिक दंगे से जुड़ी जांच रिपोर्ट तथा भुवनेश्वर के एक अस्पताल में लगी आग की रिपोर्ट सीएमओ से गायब है।
पुलिस आयुक्त एस देव दत्ता सिंह ने कहा, ''हमने गृह विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की है। एक टीम गठित की गई है जो मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। जांच पेशेवर तरीके से की जा रही है।''
कंधमाल में 2008 में 43 लोगों की हत्या की गई थी, जबकि 2016 में यहां के एसयूएम अस्पताल में लगी भीषण आग में कम से कम 22 लोग जलकर मर गए थे।
कंधमाल में दंगा 23 अगस्त 2008 को जन्माष्टमी की रात को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) नेता स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की उनके जलेशपेटा आश्रम में हत्या के तुरंत बाद हुआ था।
उपद्रवियों ने सरस्वती और एक महिला संन्यासिनी सहित उनके चार सहयोगियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसके कारण कंधमाल में बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी।
राज्य सरकार ने एक न्यायिक आयोग नियुक्त किया था जिसने 2016 में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
गृह विभाग ने बताया कि न्यायिक आयोग की रिपोर्ट 16 सितंबर 2016 को मुख्य सचिव के कार्यालय को भेजी गई थी और उसके तीन दिन बाद मुख्यमंत्री को भेज दी गई थी।
इसी प्रकार, अस्पताल में लगी आग के संबंध में राजस्व मंडल आयोग की जांच रिपोर्ट 23 मई 2018 को मुख्य सचिव के कार्यालय को भेजी गई थी और अगले दिन मुख्यमंत्री को भेज दी गई थी। लेकिन गृह विभाग के मुताबिक ये दोनों रिपोर्ट गायब हैं।
प्राथमिकी में कहा गया है कि सीएमओ को भेजी गई कई अन्य रिपोर्ट और फाइलें चार जून 2024 को गृह विभाग को लौटा दी गईं, जिस दिन विधानसभा चुनाव परिणामों से सरकार परिवर्तन के संकेत मिले थे। हालांकि, जांच आयोगों की दो रिपोर्ट गृह विभाग को वापस नहीं भेजी गईं।
यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा की ओडिशा के प्रवक्ता बिरंची नारायण त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि जांच आयोगों की दो रिपोर्ट के गायब होने के पीछे साजिश को नकारा नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा, ''दोनों मामलों में शामिल कुछ व्यक्तियों को बचाने के लिए बीजद के कार्यकाल के दौरान सीएमओ से रिपोर्ट चुराई गईं।''
त्रिपाठी ने कहा कि सत्ता संभालने के बाद भाजपा सरकार ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या और कंधमाल दंगा आयोग की रिपोर्ट के बारे में पूछताछ की लेकिन यह सीएमओ में उपलब्ध नहीं थीं।
भाजपा नेता ने कहा, ''सरकार ने गायब फाइल के संबंध में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक से दो बार संपर्क किया। लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।''
भाजपा नेता ने दावा किया, ''सरस्वती की हत्या वाले दिन ही उन्हें दी गई सुरक्षा हटा ली गई थी।'' उन्होंने कहा कि उपद्रवियों ने सरस्वती समेत पांच लोगों की उनके आश्रम में हत्या कर दी, जिसके बाद दंगा भड़क गया।
उन्होंने कहा, ''सरस्वती की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वे धर्मांतरण का विरोध कर रहे थे।''
बीजद की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया, लेकिन पार्टी नेता एवं पूर्व सांसद मुन्ना खान ने कहा कि दो साल बाद इस मामले को उठाने का कोई मतलब नहीं है।
उन्होंने कहा, ''हम यह मान ही नहीं सकते कि फाइल गुम हुई है। बीजद के कार्यकाल में फाइल गुम नहीं हुई। सरकार ने इसे दबा दिया होगा।''
कांग्रेस विधायक दल के नेता राम चंद्र कदम ने बीजद और भाजपा दोनों को दोषी ठहराया।
कदम ने कहा, ''यह शर्म की बात है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से फाइल गायब थीं। सरकार जनता की संपत्ति की रक्षा करने में विफल रही है। सरकार ने दो साल में क्या किया? अब भाजपा बढ़ते अपराधों के प्रति जनता के असंतोष से ध्यान हटाने के लिए आयोग की रिपोर्ट का मुद्दा उठा रही है।''
इसी बीच, ओडिशा उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश ए.एस. नायडू ने रिपोर्ट के गायब होने पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने ही कंधमाल दंगे और सरस्वती की हत्या के मामले की न्यायिक जांच की थी।
भाषा
संतोष खारी
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