विपक्ष के बहिर्गमन के बीच राज्यपाल ने असम की नयी सरकार का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया
वैभव
- 22 May 2026, 03:55 PM
- Updated: 03:55 PM
(फोटो के साथ)
गुवाहाटी, 22 मई (भाषा) असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने शुक्रवार को राज्य की 16वीं विधानसभा में अपने पहले अभिभाषण में अगले पांच वर्षों के लिए राज्य की नयी सरकार के दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की। इस दौरान विपक्ष ने सरकार पर जनता के असल मुद्दों का समाधान करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
सत्र के दूसरे दिन राज्यपाल के अभिभाषण के शुरू होने के सिर्फ पांच मिनट बाद ही कांग्रेस और रायजोर दल के विधायक सदन में अध्यक्ष के आसन के निकट पहुंच गये।
उन्होंने मांग की कि सरकार उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय महंगाई जैसे असल मुद्दों पर ध्यान दे।
कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
अखिल गोगोई के नेतृत्व में रायजोर दल के दोनों विधायक शुरू में सदन में ही रहे और राज्यपाल के अभिभाषण के टोकाटोकी करते रहे।
लगभग 30 मिनट बाद रायजोर दल के दोनों विधायक भी सदन से बाहर चले गए।
राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार का लगातार तीसरी बार सत्ता में आना, सत्तारूढ़ दल के दृष्टिकोण के प्रति जनता के समर्थन का प्रमाण है।
राजग ने 126 में से 102 सीट पर जीत दर्ज की।
उन्होंने कहा, ''यह जनादेश पिछले दस वर्षों में अपनाये गये शांति, आर्थिक स्थिरता और समावेशी विकास के प्रति जनता के समर्थन को दर्शाता है।
शांति बहाल करने में हासिल की गई उपलब्धियां महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रही हैं।''
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न विद्रोही संगठनों के साथ किये गये शांति समझौतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने शांति प्रक्रिया से बाहर रहने वाले एकमात्र प्रमुख समूह उल्फा (आई) से मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की।
उन्होंने लोगों से प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील पर अमल करने का आग्रह किया और कहा कि सामूहिक रूप से जिम्मेदारी निभाकर इस चुनौतीपूर्ण दौर में राष्ट्र को मजबूत किया जा सकेगा।
आचार्य ने सरकार द्वारा मौजूदा सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित प्रस्तावित कानून को पेश करने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे सामाजिक सद्भाव, न्याय, लैंगिक समानता और एक आधुनिक प्रगतिशील समाज को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने बांग्लादेश सीमा के पास बाड़ लगाने के लिए केंद्र को आवश्यक भूमि सौंपने संबंधी पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ-साथ, विशेषकर पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में, खुले और बिना बाड़ वाले क्षेत्रों के कारण घुसपैठ रोकने के प्रयास कई वर्षों तक बाधित रहे।''
उन्होंने कहा, ''राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध सरकारें अब केंद्र, असम और पश्चिम बंगाल में घनिष्ठ समन्वय से काम कर रही हैं। इस दीर्घकालिक चुनौती से निपटने के लिए अब एक सशक्त और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाया जायेगा।''
राज्यपाल ने कहा, ''सिलीगुड़ी कॉरिडोर जैसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों समेत सीमा पर बाड़बंदी का पूरा होना सीमा प्रबंधन को काफी मजबूत करेगा और घुसपैठ से अधिक प्रभावी ढंग से निपटने में मदद करेगा।''
उन्होंने सद्भाव, समानता और साझा सभ्यतागत मूल्यों पर आधारित ''असमिया समाज के पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण'' के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
वित्तीय पहलू पर राज्यपाल ने कहा कि राज्य के जीएसडीपी में लगभग 16 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ोतरी हुई है और असम 2028-29 तक 10 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में लगातार प्रगति कर रहा है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय पिछले कुछ वर्षों में दोगुनी से अधिक हो गई है, और पूंजीगत व्यय 2021-22 में 13,502 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 26,531 करोड़ रुपये हो गया है।
राज्यपाल ने रोजगार के दो लाख अवसर सृजित करने, राज्य को पहली बार बिजली अधिशेष वाला राज्य बनाने, बाढ़ से प्रभावी ढंग से निपटने, एक मजबूत कृषि अर्थव्यवस्था का निर्माण करने और स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में और सुधार करने संबंधी सरकार की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया।
भाषा
देवेंद्र वैभव
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