उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगे: अदालत ने उमर खालिद की जमानत याचिका खारिज की
अविनाश
- 19 May 2026, 08:32 PM
- Updated: 08:32 PM
नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के आरोपी और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र उमर खालिद की जमानत याचिका मंगलवार को खारिज करते हुए कहा कि राहत मांगने का आधार उचित नहीं है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर वाजपेयी आरोपी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें खालिद ने अपने चाचा के चेहल्लुम (मृत्यु के बाद 40वें दिन की रस्म) में शामिल होने और अपनी मां की देखभाल करने के लिए 15 दिन की अंतरिम जमानत का अनुरोध किया था।
खालिद की मां की सर्जरी होनी है।
अपने आदेश में न्यायाधीश ने कहा, ''अदालत का मानना है कि उसके चाचा के चेहल्लुम रस्म में शामिल होना उतना आवश्यक नहीं है। अगर रस्म किसी ऐसे व्यक्ति का होता जिसका आवेदक से करीबी संबंध होता, तो स्थिति अलग होती।''
अदालत ने यह भी कहा कि अगर रिश्ता इतना करीबी होता तो खालिद अपने चाचा की मृत्यु के तुरंत बाद राहत का अनुरोध कर सकता था।
न्यायाधीश ने कहा, ''यदि संबंध इतना घनिष्ठ था, तो आवेदक ने अपने चाचा की मृत्यु के ठीक बाद अर्जी दी होती, न कि इतने लंबे समय बाद। इसलिए, न्यायालय इस कारण को उचित नहीं मानता।''
खालिद की जमानत याचिका का विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक अनिरुद्ध मिश्रा ने अदालत को बताया कि आरोपी की पांच बहनें और पिता हैं जो खालिद की मां की सर्जरी से पहले और बाद में देखभाल कर सकते हैं।
मिश्रा ने कहा, ''सर्जरी जटिल नहीं है और यह मामूली सर्जरी है... इसलिए आरोपी को अपनी मां की देखभाल करने की कोई आवश्यकता नहीं है।''
अभियोजन पक्ष की दलीलों पर गौर करते हुए, अदालत ने कहा कि खालिद ने खुद बताया है कि उसकी पांच बहनें हैं और उसके पिता भी उसकी मां की देखभाल के लिए हैं।
अदालत ने खालिद की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, ''अभियोजन पक्ष के अनुसार, सर्जरी बहुत सरल है, यानी केवल गांठों को हटाने के लिए है, और आवेदक की ओर से किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता नहीं प्रतीत होती है।''
खालिद और अन्य पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।
खालिद को मामले में 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था।
उस पर 2020 के दंगों का ''मुख्य षड्यंत्रकारी'' होने का आरोप है। दंगों में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे।
यह हिंसा संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ व्यापक प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी।
भाषा सुभाष अविनाश
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