मोदी बार-बार पेपर लीक के बावजूद शिक्षा मंत्री प्रधान को बर्खास्त क्यों नहीं कर रहे: राहुल गांधी
सुरेश
- 17 May 2026, 06:25 PM
- Updated: 06:25 PM
(फोटो सहित)
नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से पूछा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में बार-बार पेपर लीक होने के बावजूद वह उन्हें (प्रधान को) बर्खास्त क्यों नहीं कर रहे हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में, इस मामले पर प्रधानमंत्री की ''चुप्पी'' को लेकर भी सवाल उठाया। गांधी ने कहा, ''नीट 2024: पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द नहीं हुई। मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जांच शुरू की। एक समिति गठित की गई।''
उन्होंने कहा, ''नीट 2026: पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द हुई। मंत्री ने अभी भी इस्तीफा नहीं दिया। सीबीआई फिर से जांच कर रही है। एक और समिति गठित की जाएगी।''
अनियमितताओं के आरोपों के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने तीन मई को आयोजित राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (स्नातक) (नीट-यूजी) को रद्द कर दिया। फिर से परीक्षा 21 जून को आयोजित की जाएगी।
'प्रधान को बर्खास्त करो' हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए गांधी ने कहा, ''प्रधानमंत्री मोदी, देश आपसे कुछ सवाल पूछ रहा है- उनका जवाब दीजिए। बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं? इस 'परीक्षा पे चर्चा' पर आप बार-बार चुप क्यों हैं? लगातार असफल हो रहे शिक्षा मंत्री को आप बर्खास्त क्यों नहीं कर रहे हैं?''
'परीक्षा पे चर्चा' एक ऐसा कार्यक्रम है, जिसमें प्रधानमंत्री छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से बातचीत करते हैं। इस पहल का उद्देश्य छात्रों में आत्मविश्वास, सकारात्मकता और समग्र कल्याण को बढ़ावा देकर उनके परीक्षा अनुभव को नया रूप देना है।
गांधी ने शनिवार को मांग की थी कि प्रधानमंत्री प्रधान को तुरंत बर्खास्त करें या खुद जिम्मेदारी लें।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ''भाजपा-आरएसएस गठजोड़'' ने भारत की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। गांधी ने कहा कि 22 लाख छात्रों ने दो साल तक जी-तोड़ मेहनत की और उनकी सारी मेहनत बर्बाद हो गई।
गांधी ने वीडियो बयान में कहा, ''पूरा देश जानता है कि परीक्षा से दो दिन पहले नीट का प्रश्न पत्र व्हाट्सऐप पर बांटा गया। देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कहते हैं कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।''
गांधी ने दावा किया कि प्रधान ने संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति की सिफारिश को कूड़ेदान में फेंक दिया और यह कहा था कि इस समिति में विपक्ष के लोग बैठे हैं, ऐसे में इन सिफारिशों का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने दावा किया कि प्रधान ने देश की शिक्षा व्यस्था के मूल स्वरूप को नुकसान पहुंचाया है।
भाषा आशीष सुरेश
सुरेश
1705 1825 दिल्ली