नागरिकों को देश के आर्थिक हालात के बारे में जानने का अधिकार, सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए:सुले
संतोष
- 12 May 2026, 08:13 PM
- Updated: 08:13 PM
मुंबई, 12 मई (भाषा) राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार) नेता सुप्रिया सुले ने मंगलवार को कहा कि नागरिकों को देश की अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने का अधिकार है। सुले ने केंद्र से इस मुद्दे पर पारदर्शी रूप से चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया।
बारामती से सांसद सुले ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि वैश्विक स्थिति और देश की आर्थिक हालत "गंभीर" है और इसे केवल राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राकांपा (शरद चंद्र पवार) प्रमुख शरद पवार ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करते हुए एक बयान जारी किया है।
सुले ने कहा, ''देश की आर्थिक स्थिति के बारे में सच्चाई हर भारतीय नागरिक को बताई जानी चाहिए। यह समय की मांग है।'' उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर फैल रहे विरोधाभासी बयानों और अफवाहों के कारण घबराहट और अटकलें बढ़ रही हैं।
मोदी ने अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, सोने की खरीद और विदेश यात्रा को स्थगित करने जैसे उपायों का आह्वान किया है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि केंद्र सरकार पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रतिकूल प्रभाव से लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है।
प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में संकट के बीच विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग करने, कारपूलिंग करने, इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने, पार्सल परिवहन के लिए रेल सेवाओं का उपयोग करने और घर से काम करने का सुझाव दिया।
सुले ने कहा कि पहलगाम हमले और उसके बाद चलाये गए 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसी राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों के दौरान सभी राजनीतिक दलों ने राष्ट्रीय हित में राजनीतिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए एकजुटता दिखाई थी।
यह याद दिलाते हुए कि विपक्षी नेताओं ने संकट के दौरान सरकार का समर्थन किया था, उन्होंने कहा कि आर्थिक चिंताओं को दूर करने के लिए अब इसी तरह के सामूहिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
लोकसभा सदस्य सुले ने प्रधानमंत्री मोदी से सर्वदलीय बैठक बुलाने और आगे की रणनीति तय करने के लिए अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों से परामर्श करने का आग्रह किया।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर नागरिक लंबे समय तक सोने की खरीद कम कर देते हैं तो सोने के व्यापार पर निर्भर लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आभूषण व्यवसायों से जुड़े लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
राकांपा (शरद चंद्र पवार) नेता सुले ने कहा कि अगर नागरिकों से खर्च में कटौती करने को कहा जा रहा है तो सरकारों को काफिलों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और सरकारी कार्यक्रमों पर खर्च कम करके "नैतिक जिम्मेदारी" निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा, "यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का समय नहीं है। देश को मिलकर इस स्थिति का सामना करना होगा।"
सुले ने कहा कि विपक्ष राष्ट्रीय हित में सरकार के साथ सहयोग करना जारी रखेगा, लेकिन इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों को अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति और आगे आने वाली चुनौतियों के बारे में स्पष्ट जानकारी पाने का अधिकार है।
भाषा अमित संतोष
संतोष
1205 2013 मुंबई