देहरादून जिला न्यायाधीश पूर्व सैन्यकर्मी के परिवार की मुआवजा अर्जी पर निर्देश दे:विधिक प्राधिकरण
राजकुमार
- 08 May 2026, 06:06 PM
- Updated: 06:06 PM
देहरादून, आठ मई (भाषा) उत्तराखंड विधिक सेवा प्राधिकरण ने देहरादून के जिला न्यायाधीश को राजपुर क्षेत्र में सड़क पर दो पक्षों के बीच गोलीबारी में जान गंवाने वाले सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर मुकेश जोशी के परिवार द्वारा राज्य सरकार से एक करोड़ रुपये का मुआवजा मांगे करते हुए दी गयी अर्जी पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) को उचित कार्रवाई करने के निर्देश देने को कहा है।
राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य-सचिव प्रदीप कुमार मणि ने देहरादून डीएलएसए के पदेन अध्यक्ष जिला न्यायाधीश को लिखे एक पत्र में उनसे दिवंगत पूर्व सैन्य अधिकारी की विधवा रेनू जोशी के मुआवजे आवेदन पर डीएलएसए सचिव को उचित कार्रवाई के निर्देश देने को कहा है।
अपने पत्र में मणि ने रेनू जोशी द्वारा पूर्व में दिए अपने पत्र पर कार्रवाई न होने के बाद पांच मई को भेजे गए स्मरण पत्र का हवाला देते हुए कहा, ''उक्त आवेदन देहरादून डीएलएसए को संबोधित किया गया है और इसकी प्रति इस प्राधिकरण को भेजी गयी है। अतः आपसे अनुरोध है कि कृपया डीएलएसए सचिव को उपरोक्त पत्र पर नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई करने का निर्देश दें और इसकी सूचना इस प्राधिकरण को भी दें।''
सेवानिवृत्त बिग्रडियर 30 मार्च की सुबह मसूरी रोड पर जोहड़ी गांव में रोज की तरह सुबह सैर पर निकले थे और इसी दौरान दो कार सवारों के बीच गोलियां चलने पर एक गोली उन्हें लग गयी जिससे उनकी मौत हो गयी थी।
इसके बाद, रेनू जोशी ने 16 अप्रैल को डीएलएसए के सचिव को एक पत्र लिखकर उनसे उनके 74 वर्षीय दिवंगत पति की राष्ट्र के प्रति 36 सालों तक की गयी विशिष्ट सेवाओं और उनकी मृत्यु की दुखद परिस्थतियों को देखते हुए उत्तराखंड पीडित क्षतिपूर्ति योजना 2011 के तहत राज्य सरकार को उनके एक करोड़ रुपये के दावे पर शीघ्रता से प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश देने की प्रार्थना की थी।
आवेदन पर कोई कार्रवाई न होने पर रेनू जोशी ने पांच मई को डीएलएसए को एक स्मरण पत्र भेजा जिसमें उन्होंने कहा कि 17 दिन बीतने के बाद भी अंतरिम मुआवजे पर कोई निर्णय नहीं लिया गया, न ही उनके आवेदन पत्र की स्थिति के बारे में कोई सूचना नहीं दी गयी और न ही दावे के निपटारे के लिए कोई समय सीमा दी गयी ।
उन्होंने याद दिलाया कि यह मामला दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357 ए के वैधानिक ढांचे के तहत आता है जिसमें जघन्य अपराधों के पीड़ितों को समय पर और प्रभावी राहत प्रदान करने का प्रावधान है और इसमें अंतरिम मुआवजे पर तत्काल विचार करना भी शामिल है।
परिवार को पहुंचे भावनात्मक आघात और पीड़ा का जिक्र करते हुए रेनू जोशी ने लंबित आवेदन पर शीघ्र कार्रवाई करने, योजना के प्रावधानों के अनुसार अंतरिम मुआवजा तुरंत जारी करने, आवेदन की स्थिति के बारे में अद्यतन जानकारी देने तथा उसके अंतिम निपटारे के लिए अपेक्षित समयसीमा की सूचना देने का अनुरोध किया है।
भाषा दीप्ति
राजकुमार
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