एयर इंडिया ने 'मुश्किल समय' में उठाए खर्च घटाने के कदम, वेतन वृद्धि एक तिमाही टली
रमण
- 08 May 2026, 06:56 PM
- Updated: 06:56 PM
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) एयर इंडिया के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कैंपबेल विल्सन ने शुक्रवार को कर्मचारियों को गैर-जरूरी खर्चों पर लगाम लगाने और अनावश्यक खर्चों को टालने का निर्देश दिया। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों ने कहा कि विल्सन ने इस समय के मुश्किल हालात में एयरलाइन की लागत घटाने की जरूरत पर जोर देते हुए यह निर्देश जारी किया है।
इसके साथ ही पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कई चुनौतियों से जूझ रही एयर इंडिया के प्रबंधन ने कर्मचारियों की छंटनी की आशंका से इनकार किया।
विल्सन ने एयरलाइन के मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) संजय शर्मा और मुख्य मानव संसाधन अधिकारी रवींद्र कुमार जीपी के साथ कर्मचारियों को संबोधित करते हुए यह निर्देश दिए।
सूत्रों के मुताबिक, रवींद्र कुमार ने कहा कि कंपनी पिछले वित्त वर्ष के लिए 'परिवर्तनीय वेतन' (वेरिएबल पे) जारी रखेगी और तय पदोन्नतियों को भी लागू करेगी। हालांकि अनिश्चित आर्थिक माहौल को देखते हुए वार्षिक वेतन वृद्धि को कम से कम एक तिमाही के लिए टाल दिया जाएगा।
इसके साथ ही मानव संसाधन प्रमुख ने कहा, "हम कर्मचारियों की छंटनी की आशंका नहीं देख रहे हैं।"
विल्सन ने मुश्किल समय में लागत पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत पर बल देते हुए कर्मचारियों से गैर-जरूरी खर्च रोकने, जहां संभव हो वहां दरों की पुनर्समीक्षा करने और गैर-आवश्यक खर्च स्थगित करने को कहा।
उन्होंने कहा, "फिजूल खर्च और राजस्व में होने वाले नुकसान को रोकने पर पूरी सख्ती और विशेष ध्यान देने की जरूरत है।"
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण हवाई क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों और विमान ईंधन की बढ़ती कीमतों का एयरलाइन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। एयर इंडिया इस समय व्यापक बदलाव योजना पर काम कर रही है और हाल के महीनों में उसकी परिचालन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मुख्य वित्त अधिकारी शर्मा ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में राजस्व में नरमी देखी गई है, जबकि बाहरी अनिश्चितताओं का असर बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक में संभावित लागत कटौती उपायों पर भी चर्चा हुई, जिसमें अस्थायी अवकाश जैसे विकल्प शामिल हैं। कंपनी में लगभग 24 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं।
विल्सन ने पाकिस्तान हवाई क्षेत्र के लंबे समय तक बंद रहने, पश्चिम एशिया में संघर्ष और वैश्विक तनावों के कारण उड़ानों पर पड़ रहे असर का भी उल्लेख किया।
उन्होंने रुपये में तेज गिरावट और विमान ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को भी कंपनी के लिए चुनौती बताया।
एयर इंडिया समूह को वित्त वर्ष 2025-26 में 22 हजार करोड़ रुपये से अधिक का घाटा होने का अनुमान है।
भाषा योगेश रमण
रमण
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