यौन उत्पीड़न शिकायत: अदालत ने कूपर अस्पताल के डीन के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी को रिकॉर्ड से हटाया
दिलीप
- 04 May 2026, 03:59 PM
- Updated: 03:59 PM
मुंबई, चार मई (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने निगम द्वारा संचालित कूपर अस्पताल के डीन सुधीर मेधेकर के खिलाफ एक समिति द्वारा की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटा दिया है। समिति ने उक्त टिप्पणी मेडिकल की एक छात्रा द्वारा अपने शिक्षक के खिलाफ की गई यौन उत्पीड़न की शिकायत पर समय पर कार्रवाई करने में विफल रहने को लेकर की थी। अदालत ने कहा कि ऐसी टिप्पणी से मेधेकर की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
न्यायमूर्ति आर आई छागला और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की पीठ ने पिछले महीने पारित आदेश में कहा कि मेधेकर के खिलाफ यौन दुर्व्यवहार के कोई आरोप नहीं हैं और उनके खिलाफ एकमात्र शिकायत यह है कि छात्र की शिकायत पर वह समय पर कार्रवाई करने में विफल रहे।
अदालत ने समिति की रिपोर्ट के आधार पर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा मेधेकर को जारी किए गए चेतावनी मेमो को भी रद्द कर दिया।
अदालत ने कहा कि एमआईसीसी की रिपोर्ट में मेधेकर के खिलाफ टिप्पणी और बीएमसी का चेतावनी मेमो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन हैं, क्योंकि यह उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना जारी की गईं।
उच्च न्यायालय ने कहा, ''ऐसी प्रतिकूल टिप्पणियों से याचिकाकर्ता (मेधेकर) की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।''
उच्च न्यायालय ने कहा कि मेधेकर के बारे में एक "भ्रामक और प्रतिकूल धारणा" बनी, जिससे उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुंची।
मेधेकर ने सितंबर 2024 में मुख्य आंतरिक शिकायत समिति (एमआईसीसी) द्वारा उनके खिलाफ की गई कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने और उन टिप्पणियों के परिणामस्वरूप उप नगर आयुक्त (जन स्वास्थ्य) द्वारा उन्हें जारी किए गए चेतावनी मेमो को रद्द करने का अनुरोध किया था।
अक्टूबर 2024 में, मेधेकर को नायर अस्पताल के डीन के पद से स्थानांतरित करके हिंदूहृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे मेडिकल कॉलेज और आर एन कूपर अस्पताल भेज दिया गया। यह कार्रवाई एमआईसीसी के रुख अपनाने के बाद की गई कि अस्पताल के प्राधिकारियों, मुख्य रूप से डीन ने एमबीबीएस की द्वितीय वर्ष की एक छात्रा द्वारा एक वरिष्ठ मेडिकल शिक्षक के खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न की शिकायत के प्रति "असंवेदनशील" रवैया अपनाया।
एमआईसीसी ने अपने निष्कर्षों में और बीएमसी ने अपने चेतावनी मेमो में यह राय व्यक्त की थी कि मेधेकर सहित नायर अस्पताल के प्राधिकारियों ने छात्रा द्वारा की गई यौन उत्पीड़न की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई नहीं की और/या समय पर कार्रवाई करने में विफल रहे।
भाषा अमित दिलीप
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