असम चुनाव: राज्य राजनीति में पदार्पण करने वाले गौरव को पहले ही चुनाव में मिली करारी हार
माधव
- 04 May 2026, 05:09 PM
- Updated: 05:09 PM
गुवाहाटी, चार मई (भाषा) कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई को अपने राजनीतिक जीवन में पहली बार चुनावी हार का सामना करना पड़ा है। उन्हें जोरहाट विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता हितेंद्रनाथ गोस्वामी से 23,182 वोट से हार मिली है।
तीन बार के सांसद गोगोई अपने पिता तरुण गोगोई की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए केंद्र की राजनीति के बाद राज्य की राजनीति में वापसी करने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन गोस्वामी ने उनके इस अरमान पर पानी फेर दिया।
गोगोई को 46,257 वोट मिले, जबकि गोस्वामी ने 69,439 वोट हासिल करके लगातार तीसरी बार सीट बरकरार रखी।
इससे पहले 2024 के लोकसभा चुनाव में गोगोई ने जोरहाट सीट से जीत दर्ज की थी। जोरहाट लोकसभा सीट के परिणाम से सत्तारूढ़ भाजपा, खासकर मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा रक्षात्मक मुद्रा में आ गए थे।
विधानसभा चुनाव में जोरहाट सीट पर राजनीतिक मुकाबला तब और तीखा हो गया जब शर्मा ने गोगोई और उनकी ब्रिटिश मूल की पत्नी पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध होने का आरोप लगाया।
इस मामले में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया, जिसने पिछले साल सितंबर में अपनी रिपोर्ट सौंपी।
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गोगोई ने इन आरोपों को "बेबुनियाद" बताया और कहा कि "यह कहानी किसी सी-ग्रेड बॉलीवुड फिल्म से भी बदतर है।"
बताया जाता है कि तरुण गोगोई के मुख्यमंत्री के तौर पर तीसरे कार्यकाल के दौरान शर्मा और गोगोई के बीच संबंध खराब हो गए थे, जिसके बाद शर्मा ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था।
जोरहाट से लोकसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस का मनोबल बढ़ा था। यह सीट गोगोई के पुराने निर्वाचन क्षेत्र कलियाबोर के परिसीमन के बाद नयी बनी थी।
पार्टी ने बाद में उन्हें विधानसभा चुनाव से पहले असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया, जिससे यह संकेत मिला कि मुख्यमंत्री के आरोपों के बावजूद पार्टी को उन पर पूरा भरोसा है।
कई वरिष्ठ नेताओं के भाजपा में जाने के बावजूद 43 वर्षीय गोगोई ने जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने, ग्रामीण मतदाताओं और महिलाओं तक पहुंच बनाने और क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करने पर ध्यान दिया।
उन्होंने रायजोर दल, असम जातीय परिषद, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस (एपीएचएलसी) के साथ गठबंधन किया।
कांग्रेस ने उन्हें विपक्ष का मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर जोरहाट विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया।
हालांकि, उन्होंने अपने क्षेत्र को सीमित समय दिया क्योंकि वह पूरे राज्य में कांग्रेस और सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के लिए प्रचार कर रहे थे।
फिर भी उन्होंने कहा कि जोरहाट उनका गृहनगर है, जहां लोगों का उनके और पार्टी के प्रति गहरा लगाव है।
उन्होंने कई बार कहा कि विधानसभा चुनाव कांग्रेस की राजनीति (जिसका नेतृत्व उनके पिता तरुण गोगोई ने किया) और भाजपा में शामिल कांग्रेस की राजनीति (जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री सरमा कर रहे हैं) के बीच लड़ाई है।
गोगोई ने कहा, "लोग देख रहे हैं कि हम राजनीति कैसे कर रहे हैं। उन्हें मेरे पिता तरुण गोगोई की राजनीति याद है, जिन्होंने असम को उग्रवाद से बाहर निकाला, शांति बहाल की और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित की। लोगों को उम्मीद है कि ऐसी शासन व्यवस्था फिर लौटेगी।"
उन्होंने यह भी कहा कि लोग विपक्ष से "पिछले छह-सात वर्षों की गंदी राजनीति को साफ करने, एक वैकल्पिक सरकार देने और औद्योगिक विकास सुनिश्चित करने" की उम्मीद रखते हैं।
राहुल गांधी और प्रियंका वाद्रा के करीबी गोगोई की भाषण कला संसद में उस समय सबके सामने आई थी जब उन्होंने मणिपुर हिंसा पर सरकार की चुप्पी के खिलाफ 'इंडिया' गठबंधन की ओर से अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था।
वह कई संसदीय समितियों के सदस्य रहे हैं और हाल में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा भारत-फिलीपीन संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं।
गोगोई ने 2004 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नयी दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई की और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में परास्नातक डिग्री प्राप्त की।
ब्रिटेन में जन्मीं एलिज़ाबेथ क्लेयर से गोगोई का विवाह हुआ तथा उनका एक बेटा और एक बेटी है।
भाषा
जोहेब माधव
माधव
0405 1709 गुवाहाटी