थॉमस कप सेमीफाइनल : फ्रांस से 0-3 से हारा भारत, कांस्य पदक से संतोष किया
नमिता
- 03 May 2026, 01:01 AM
- Updated: 01:01 AM
होर्सेंस (डेनमार्क), दो मई (भाषा) भारत की फिर से खिताब जीतने की उम्मीदें शनिवार को यहां थॉमस कप फाइनल्स के सेमीफाइनल में फ्रांस से 0-3 से मिली हार से निराशा में बदल गई और उसे कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
लक्ष्य सेन का नहीं खेलना भारत को भारी पड़ा और एच एस प्रणय भी आयुष शेट्टी और किदांबी श्रीकांत की तरह हार गए।
प्रणय को दुनिया के 17वें नंबर के खिलाड़ी टोमा जूनियर पोपोव के हाथों 19-21, 16-21 से हार का सामना करना पड़ा।
इस पूरी तरह से एकतरफा मुकाबले में भारत एक भी गेम जीतने में नाकाम रहा।
2022 की चैंपियन टीम भारत ने सेमीफाइनल में पहुंचकर एक पदक पक्का कर लिया था। इस तरह इस पदक से 1952, 1955 और 1979 में कांस्य पदकों में इजाफा हुआ।
फ्रांस इस जीत के साथ डेनमार्क के 2016 में पहला खिताब जीतने के बाद फाइनल में पहुंचने वाला दूसरा यूरोपीय देश बन गया।
आयुष को शुरूआती एकल में दुनिया के चौथे नंबर के खिलाड़ी क्रिस्टो पोपोव से और फिर दूसरे एकल में किदांबी श्रीकांत को दुनिया के 10वें नंबर के खिलाड़ी एलेक्स लैनियर से हार मिली।
लक्ष्य सेन की दाहिनी कोहनी में सूजन थी जिसके बाद 20 साल के आयुष को शुरुआती एकल में उतारा गया। पर आयुष फ्रांस के पोपोव की रणनीति का मुकाबला करने में नाकाम रहे और 39 मिनट में 11-21, 9-21 से पराजित हो गए।
इसके बाद सभी की नजरें श्रीकांत पर थीं कि वह मैच बराबर करें, लेकिन दुनिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी कड़ी चुनौती पेश करने के बावजूद भी 16-21, 18-21 से हार गए।
फिर जिम्मेदारी एच एस प्रणय पर थी कि वह भारत की उम्मीदों को जीवंत रखें। 2023 विश्व चैंपियनशिप के कांस्य पदक विजेता ने बेहतर चुनौती पेश की लेकिन वह दुनिया के 17वें नंबर के खिलाड़ी टोमा जूनियर पोपोव को नहीं हरा सके।
श्रीकांत ने मैच की शुरुआत बराबरी पर की। वह 3-3 से बराबरी पर थे। लेकिन लैनियर ने ब्रेक तक बढ़त बना ली।
श्रीकांत को अपनी गलतियों से जूझना पड़ा और वे 9-14 से पीछे हो गए। हालांकि उन्होंने थोड़ी वापसी करते हुए अंतर को कम करके 15-18 तक पहुंचाया, लेकिन नेट पर एक गलती के कारण लैनियर ने गेम प्वाइंट जीत लिया।
दूसरा गेम भी कुछ इसी तरह का रहा। श्रीकांत ने शुरुआती पिछड़ने के बाद वापसी की और लगातार आक्रामक विनर लगाकर 7-7 से बराबरी कर ली। लेकिन लैनियर की रणनीति के कारण भारतीय खिलाड़ी से गलतियां हुईं और वे 10-15 से पीछे हो गए।
श्रीकांत ने कोशिश की और अंतर को कम करके 15-16 तक पहुंचाया, लेकिन आखिरी पलों में उनसे फिर गलतियां हो गईं। लैनियर को दो मैच प्वाइंट मिले और श्रीकांत का शॉट नेट में फंसने से लैनियर ने मैच जीत लिया।
इससे पहले पोपोव के हाथों आयुष की यह दूसरी हार थी। इससे पहले 2024 में हायलो ओपन में हुई उनकी एकमात्र भिड़ंत में भी आयुष को हार का सामना करना पड़ा था।
पोपोव ने शुरू से ही मैच पर अपना दबदबा बनाए रखा। उन्होंने कोर्ट के चारों ओर आयुष को दौड़ाने के लिए तेज रिटर्न का इस्तेमाल किया और नेट पर शुरुआती नियंत्रण हासिल कर लिया।
भारतीय खिलाड़ी ने शुरुआत में तो धैर्य दिखाया, लेकिन लगातार की गई कुछ गलतियों के कारण फ्रांसीसी खिलाड़ी 8-3 की बढ़त बनाने में कामयाब रहा।
आयुष ने बीच-बीच में कुछ अच्छे शॉट लगाए लेकिन वह दबाव बरकरार नहीं रख सके। पोपोव ने ब्रेक तक 11-6 की बढ़त बनाई और फिर इसे 15-6 तक पहुंचा दिया।
हालांकि पोपोव की कुछ गलतियों ने थोड़ी देर के लिए आयुष को मैच में बनाए रखा, लेकिन भारतीय खिलाड़ी इसका फ़ायदा नहीं उठा सका। फ्रांसीसी खिलाड़ी ने कुछ गेम प्वाइंट गंवाने के बाद भी पहला गेम आसानी से अपने नाम कर लिया।
दूसरा गेम भी लगभग यही सिलसिला रहा। पोपोव ने शुरू में ही अपनी पकड़ मज़बूत कर ली और फ्रंट कोर्ट (नेट के पास) के खेल पर पूरी तरह से हावी रहे। आयुष थोड़े हिचकिचाते हुए दिखे और अपने विरोधी के खेल को समझने में उन्हें काफी मुश्किल हुई जबकि पोपोव बार-बार उनके बैकहैंड वाले कोने को निशाना बनाकर उन पर दबाव बनाते रहे।
फ्रांसीसी खिलाड़ी ब्रेक तक 11-2 की बढ़त बनाने में कामयाब रहा और उसने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने रैलियों पर नियंत्रण बनाए रखा। आयुष के इक्का-दुक्का विनर तब आए जब काफी देर हो चुकी थी। पोपोव 19-8 की बढ़त पर पहुंच गए, जिसके बाद उन्होंने लगातार कई मैच प्वाइंट हासिल किए और आसानी से यह मुक़ाबला जीत लिया।
आयुष ने कहा, ''आज के प्रदर्शन से मैं थोड़ा निराश हूं, लेकिन क्रिस्टो बहुत बढ़िया खेला। वह मुझ पर काफ़ी दबाव बना रहा था मुझे लगता है कि मेरी रणनीति सही नहीं थी, मैं ऐसा ही कहूंगा। मुझे लगता है कि आज उसने मुझे पूरी तरह से मात दे दी। ''
उन्होंने कहा, ''मेरा मकसद उस पर दबाव बनाना था, लेकिन उसने मुझे नेट पर शॉट लगाने का कोई मौका ही नहीं दिया। मुझे लगता है कि नेट पर उसका दबदबा रहा और आज उसके शॉट भी थोड़े तेज थे। इसी वजह से फर्क पड़ा। ''
भारत के पूर्व मुख्य कोच विमल कुमार ने कहा कि लक्ष्य सेन की गैरमौजूदगी एक बड़ा झटका थी और फ्रांस के खिलाफ मुक़ाबले में इसकी कमी साफ महसूस हुई।
उन्होंने कहा, ''आज फ्रांस ने भारत को पूरी तरह से पछाड़ दिया और अहम मौकों पर लक्ष्य की कमी साफ़ महसूस हुई। भारत के लिए यह समय है कि वह फिर से एकजुट हो और और भी मजबूती से वापसी करे। इस टीम की काबिलियत है पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। ''
भाषा नमिता
नमिता
0305 0101 होर्सेंस (डेनमार्क)