नीट परीक्षा से पहले छुट्टी संबंधी एनएमसी के परामर्श की चिकित्सकों ने की आलोचना
दिलीप
- 02 May 2026, 10:42 PM
- Updated: 10:42 PM
नयी दिल्ली, दो मई (भाषा) राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) ने चिकित्सा महाविद्यालयों को एक परामर्श जारी करके कहा है कि वे नीट-स्नातक 2026 परीक्षा से पहले 2 और 3 मई को छात्रों को छुट्टी ना दें।
इस परामर्श के बाद चिकित्सा जगत में तीखी आलोचना हुई।
चिकित्सकों के संगठन, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) ने इस निर्देश को तुरंत वापस लेने और नियामक से माफी मांगने की मांग की।
तेईस अप्रैल को जारी एक नोटिस में, एनएमसी ने सभी चिकित्सा महाविद्यालयों और संस्थानों को 3 मई को होने वाली नीट-स्नातक 2026 परीक्षा की "शुचिता और अखंडता" सुनिश्चित करने के लिए सतर्क रहने का निर्देश दिया।
एनएमसी सचिव राघव लैंगर द्वारा हस्ताक्षरित नोटिस में कहा गया है, ''किसी भी संभावित दुरुपयोग को रोकने और परीक्षा का निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित करने के लिए एक एहतियाती कदम के रूप में, यह सलाह दी जाती है कि 2 मई और 3 मई, 2026 को छात्रों को छुट्टी ना दी जाए, सिवाय असाधारण परिस्थितियों में उचित कारण के साथ।''
यह परामर्श, शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है। इसमें संस्थानों से यह भी कहा गया है कि वे मेडिकल छात्रों को जागरूक करें, ताकि वे परीक्षा के संचालन को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि में शामिल न हों।
इस कदम का विरोध करते हुए, एफएआईएमए ने निर्देश को "असंवेदनशील", "मनमाना" और मेडिकल छात्रों के लिए "अपमानजनक" बताया।
शुक्रवार को एनएमसी सचिव को लिखे पत्र में, एफएआईएमए ने कहा कि यह सलाह एक "अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण मानसिकता" को दर्शाती है, जो मेडिकल छात्रों को संदेह की नजर से देखती है और उन्हें अनुचित रूप से संभावित कदाचार से जोड़ती है।
एसोसिएशन ने कहा, "पूरे भारत में मेडिकल छात्र समाज के सबसे अनुशासित और समर्पित वर्गों में से हैं, जो राष्ट्र की स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं की सेवा के लिए समर्पित हैं। बिना ठोस औचित्य के व्यापक प्रतिबंध लगाना अन्यायपूर्ण, मनमाना है और एक खतरनाक मिसाल कायम करता है।"
एफएआईएमए ने कहा कि परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखना परीक्षा आयोजित करने वाले प्राधिकारियों की जिम्मेदारी है, जिसके लिए उन्हें ठोस प्रशासनिक उपाय करने चाहिए, न कि इसमें शामिल नहीं होने वाले व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने चाहिए।
एसोसिएशन ने आश्वासन मांगा कि नियामक भविष्य में इस तरह के निर्देश जारी नहीं करेगा।
पत्र में कहा गया है, "चिकित्सा जगत किसी भी ऐसे उपाय का एकजुट होकर विरोध करता है"
भाषा अमित दिलीप
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