उप्र: छेड़छाड़ के मामले में वायुसेना का जवान बरी, 'पीड़िता' ने कहा 'घटना सपने में हुई'
जितेंद्र
- 11 Mar 2026, 11:56 PM
- Updated: 11:56 PM
कानपुर, 11 मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश के कानपुर की एक विशेष अदालत ने नाबालिग साली से छेड़छाड़ के मामले में आरोपी वायुसेना के एक जवान को बरी कर दिया।
पीड़िता ने अदालत में बयान दिया कि घटना ''सपने में हुई थी'' और उसने गलतफहमी में शोर मचा दिया था।
हालांकि इस मामले में वायुसेना के जवान को 19 दिन जेल में बिताने पड़े।
अदालत ने कथित तौर पर झूठे सबूत पेश करने के लिए शिकायतकर्ता विजय कुमार तिवारी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने का भी निर्देश दिया।
पुलिस ने 15 वर्षीय लड़की के पिता विजय कुमार की शिकायत के आधार पर तीन अगस्त, 2019 को नौबस्ता थाने में मामला दर्ज किया था।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि लड़की के जीजा अनुराग शुक्ला ने सोते समय उससे छेड़छाड़ की थी।
बचाव पक्ष के वकील करीम अहमद सिद्दीकी ने बुधवार को 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि 15 साल की एक लड़की ने आरोप लगाया था कि आठ मार्च 2019 को नौबस्ता के खाड़ेपुर में बहन के ससुराल में सोते समय उसके जीजा अनुराग शुक्ला ने उससे कथित तौर पर छेड़छाड़ की थी।
उन्होंने बताया कि लड़की के आरोपों के आधार पर लगभग पांच महीने बाद तीन अगस्त 2019 को नौबस्ता थाने में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी और जमानत मिलने से पहले शुक्ला को 19 दिन जेल में बिताने पड़े थे।
सिद्दीकी ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान लड़की ने अदालत को बताया कि वह 'एंटीबायोटिक' दवाएं ले रही थी और घटना वाली रात वह अर्द्धबेहोशी की हालत में थी तभी उसे ''सपने में महसूस'' हुआ कि उसके जीजा अनुराग शुक्ला ने उसे पकड़ लिया और उससे छेड़छाड़ की, जिसके बाद वह डरकर जाग गई और शोर मचा दिया।
उन्होंने बताया कि लड़की के पिता और बड़ी बहन ने भी अदालत को बताया कि शुक्ला के खिलाफ शिकायत गलतफहमी में दर्ज कराई गई थी।
सिद्दीकी ने बताया कि पॉक्सो की विशेष अदालत की न्यायाधीश रश्मि सिंह ने सात मार्च को शुक्ला को बरी कर दिया, जिससे सात साल की कानूनी लड़ाई खत्म हो गई।
अदालत ने पाया कि ऐसा प्रतीत होता है कि झूठे सबूत रिकॉर्ड पर रखे गए हैं और संबंधित क्लर्क को आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 344 के तहत तिवारी के खिलाफ अलग से आपराधिक विविध कार्यवाही दर्ज करने और कानून के अनुसार उन्हें नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
सीआरपीसी की धारा 344 अदालत को न्यायिक कार्यवाही के दौरान जानबूझकर झूठे साक्ष्य देने या मनगढ़ंत साक्ष्य देने वाले व्यक्ति को संक्षेप में दंडित करने का अधिकार देती है।
शुक्ला ने फोन पर 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि उसके खिलाफ तीन अगस्त 2019 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी और उन्हें उसी वर्ष 29 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।
उन्होंने कहा कि 17 अक्टूबर को जमानत मिलने से पहले उन्हें 19 दिन जेल में बिताने पड़े।
शुक्ला ने कहा कि इस मुकदमे की वजह से उन्हें बहुत मानसिक तनाव हुआ और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा तथा करियर की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा।
उन्होंने दावा किया कि इस मुकदमे के कारण वह 2020 में कॉर्पोरल के पद पर प्रोन्नति नहीं पा सके और उन्हें 'लीडिंग एयरक्राफ्टमैन' के तौर पर ही काम करना पड़ा।
शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया, ''मुझे झूठे मामले में फंसाया गया, क्योंकि मेरे ससुर विजय तिवारी चाहते थे कि मैं अपनी जमीन, घर और दूसरी संपत्ति अपनी पत्नी और साली के नाम कर दूं।''
भाषा सं सलीम जफर जितेंद्र
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1103 2356 कानपुर