ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस बृहस्पतिवार को सौंप सकता है विपक्ष
नरेश
- 11 Mar 2026, 07:54 PM
- Updated: 07:54 PM
नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस के लिए आवश्यक हस्ताक्षर ले लिये गए हैं और संसद के दोनों सदनों में बृहस्पतिवार को सौंपा जा सकता है।
सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
इस घटनाक्रम से अवगत एक वरिष्ठ सांसद ने बताया कि उन्होंने हस्ताक्षर एकत्र करने का काम पूरा कर लिया है और नोटिस बृहस्पतिवार को सौंपा जा सकता है।
सांसद ने यह भी कहा कि नोटिस दोनों सदनों में दिया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि बुधवार शाम तक, लगभग 120 सांसदों ने लोकसभा में दिये जाने वाले नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं और लगभग 60 सांसदों ने उच्च सदन में दिये जाने वाले नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं।
नियमों के मुताबिक, लोकसभा में कम से कम 100 सदस्यों के हस्ताक्षर वाला नोटिस और राज्यसभा में कम से कम 50 सदस्यों के हस्ताक्षर करने वाला नोटिस देना होता है।
सूत्रों ने बताया कि नोटिस पर 'इंडिया' गठबंधन के सभी घटक दलों के सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं।
यह पहली बार है जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने के लिए कोई नोटिस दिया जा रहा है।
विपक्षी दलों ने कई मौकों पर सीईसी पर सत्तारूढ़ भाजपा की मदद करने का आरोप लगाया है। विपक्ष मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की कवायद को लेकर पिछले कुछ महीनों से उन पर लगातार निशाना साधता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर का उद्देश्य भाजपा की मदद करना है।
कानून के अनुसार, सीईसी को ''उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए मौजूद प्रक्रिया, और समान आधार पर ही पद से हटाया जा सकता है।''
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनुशंसा के बिना अन्य निर्वाचन आयुक्तों को पद से नहीं हटाया जा सकता।
न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के अनुसार, किसी भी सदन में, न्यायाधीश को पद से हटाने का प्रस्ताव स्वीकृत हो जाने के बाद, (लोकसभा) अध्यक्ष या (राज्यसभा) सभापति, जैसा भी मामला हो, तीन सदस्यीय समिति का गठन करेंगे जो उन आधारों की जांच करेगी, जिन पर पद से उन्हें हटाने की मांग की गई है।
समिति में प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) या शीर्ष न्यायालय के न्यायाधीश, 25 उच्च न्यायालयों में से किसी एक के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित न्यायविद होते हैं।
समिति की कार्यवाही किसी भी अदालती कार्यवाही की तरह होती है, जिसमें गवाहों और आरोपियों से जिरह की जाती है।
सीईसी को भी समिति के समक्ष बोलने का अवसर मिलता है।
नियम के अनुसार, समिति द्वारा रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद, इसे सदन में पेश किया जाएगा और पद से हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हो जाएगी। हालांकि, सीईसी को अपना बचाव करने का अधिकार होता है।
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नरेश
1103 1954 दिल्ली