गलत रक्त चढ़ाने से मौत के मामले में अदालत ने उप्र सरकार को उच्चस्तरीय समिति बनाने का निर्देश
खारी
- 18 Feb 2026, 10:57 PM
- Updated: 10:57 PM
प्रयागराज (उप्र), 18 फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महिला मरीज की कथित तौर पर गलत रक्त चढ़ाने से हुई मौत के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने और जवाबदेही तय करने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश राज्य सरकार द्वारा अदालत के समक्ष यह स्वीकार करने के बाद पारित किया गया कि पिछले वर्ष स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में गलत रक्त चढ़ाए जाने से महिला मरीज की मौत हुई थी।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने राज्य सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता तथा याचिकाकर्ता के वकीलों से यह भी सहायता मांगी कि ऐसे मामलों में संवैधानिक अदालत किन मापदंडों के तहत मुआवजा दे सकती है।
अदालत ने यह आदेश महिला के पुत्र सौरभ सिंह की याचिका पर दो फरवरी को सुनवाई करते हुए दिया।
एसआरएन अस्पताल, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से संबद्ध राज्य संचालित अस्पताल है।
सुनवाई के दौरान एएजी ने स्वीकार किया कि महिला का ब्लड ग्रुप 'ओ पॉजिटिव' था, लेकिन उसे 'एबी पॉजिटिव' रक्त चढ़ा दिया गया, जिससे ऑपरेशन के बाद गंभीर जटिलताएं पैदा हुईं और उसकी मृत्यु हो गई।
अदालत ने रिकॉर्ड पर मौजूद चिकित्सा दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया बाद में दिया गया उपचार केवल "गलत रक्त समूह चढ़ाने के दुष्प्रभावों को कम करने" का प्रयास प्रतीत होता है।
अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जीवन का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है और इसे सुरक्षित रखना राज्य व उसके अधिकारियों का संवैधानिक दायित्व है।
अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य पर भर्ती मरीजों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी थी और यह घटना उस कर्तव्य की विफलता दर्शाती है।
राज्य ने जब मौत का कारण गलत रक्त चढ़ाना स्वीकार कर लिया, तो अदालत ने कहा कि उसे लापरवाही के प्रश्न पर निर्णय देने की आवश्यकता नहीं है।
अदालत ने मामले में छठे प्रतिवादी बनाए गए चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक (डीजीएमई), उप्र को निर्देश दिया कि वह अस्पताल प्रशासन को एक समिति गठित करने के लिए कहें जो प्राचार्य की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों के सदस्यों के साथ मेडिकल कॉलेज के समग्र कार्यप्रणाली से संबंधित आवश्यक आंकड़े व सिफारिशें जुटाएगी।
अदालत ने निर्देश दिया कि आवश्यक "बुनियादी ढांचा या प्रक्रियात्मक दिशानिर्देशों" को दर्शाती विस्तृत रिपोर्ट पांच सप्ताह के भीतर महानिदेशक को सौंपी जाए।
साथ ही महानिदेशक को इन सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए वित्तीय या प्रशासनिक हर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का दायित्व भी सौंपा गया है।
अदालत ने मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को समिति की रिपोर्ट और महानिदेशक की प्रतिक्रिया रिकॉर्ड पर लाते हुए व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया।
मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को निर्धारित है।
भाषा सं जफर खारी
खारी
1802 2257 प्रयागराज