ओडिशा ने विकास लक्ष्यों को पूरा करने के लिए जेआईसीए से समर्थन मांगा
संतोष
- 11 Feb 2026, 09:21 PM
- Updated: 09:21 PM
भुवनेश्वर, 11 फरवरी (भाषा) ओडिशा सरकार ने बुधवार को राज्य और देश के विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए 'जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी' (जेआईसीए) से सहयोग मांगा।
भारत में जेआईसीए-सहायता प्राप्त वानिकी परियोजनाओं की 14वीं राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए राज्य के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने स्थानीय लोगों के हितों की सुरक्षा में एजेंसी के सहयोग की सराहना की।
उन्होंने कहा, "हम जेआईसीए और जापान सरकार के सहयोग के लिए आभारी हैं। वे हमें वनों, पर्यावरण और लोगों की आजीविका, विशेषकर आदिवासियों, अनुसूचित जातियों और पिछड़े वर्गों के हितों की रक्षा करने में मदद करते हैं। स्थानीय लोगों के हितों की सुरक्षा के लिए ओडिशा को उनके निरंतर सहयोग की आवश्यकता है।"
खुंटिया ने बताया कि जेआईसीए से सहायता प्राप्त ओडिशा वानिकी क्षेत्र विकास परियोजना (ओएफएसडीपी) का पहला चरण 2006-07 से 2014-15 तक सफलतापूर्वक चला।
उन्होंने कहा, "अब चरण-द्वितीय 2017-18 से राज्य के 12 वन प्रभागों और दो वन्यजीव प्रभागों में संचालित हो रहा है।"
मंत्री ने कहा कि ओएफएसडीपी का दूसरा चरण मार्च 2027 में समाप्त होने जा रहा है और राज्य सरकार को उम्मीद है कि 'विकसित ओडिशा 2036' और 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद के लिए केंद्र सरकार और जेआईसीए से तीसरे चरण की नई परियोजना के क्रियान्वयन में सहयोग मिलेगा।
यह परियोजना संयुक्त वन प्रबंधन (जेएफएम) के सिद्धांतों पर सामुदायिक भागीदारी और अंतर्विभागीय समन्वय के माध्यम से आजीविका संवर्धन के साथ सतत वन प्रबंधन (एसएफएम) पर केंद्रित है।
मंत्री ने कहा कि सतत वन प्रबंधन के तहत लोगों ने 1,210 वन सुरक्षा समितियों (वीएसएस) और 10 इको-डेवलपमेंट समितियों (ईडीसी) के माध्यम से 1.257 लाख हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र की सुरक्षा और प्रबंधन किया है।
उन्होंने बताया कि वनों के बाहर निजी भूमि पर कृषि वानिकी रोपण 8,650 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में किया गया है, जिसमें ओएफएसडीपी चरण-द्वितीय के तहत 18,000 से अधिक किसान जुड़े हैं।
खुंटिया ने कहा, "ओएफएसडीपी के पहले चरण की सफलता से प्रेरित होकर राज्य सरकार ने 2016-17 से 2024-25 तक 'अमा जंगल योजना' (एजेवाई) शुरू की, जिसके तहत 22 वन प्रभागों में 4.2 लाख परिवारों को शामिल कर सतत वन प्रबंधन को बढ़ावा दिया गया।"
उन्होंने बताया कि हाल ही में सिमिलीपाल राष्ट्रीय उद्यान के आसपास के लगभग 400 गांवों के लिए 'अमा सिमिलीपाल योजना' (एएसवाई) को मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य वन्यजीवों की रक्षा और आदिवासी समुदायों को सतत आजीविका प्रदान करना है।
इसी उद्देश्य से 15 जिलों के 20 वन प्रभागों में 'अमा बन ओ जीविका प्रकल्प' नामक एक अन्य योजना पर भी विचार किया जा रहा है।
राष्ट्रीय कार्यशाला 13 फरवरी तक जारी रहेगी।
भाषा तान्या संतोष
संतोष
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