ओडिशा की लड़की ने दिदायी आदिम समुदाय की पहली छात्रा के तौर पर एमबीबीएस सीट हासिल की
सुभाष नरेश
- 19 Aug 2025, 07:26 PM
- Updated: 07:26 PM
भुवनेश्वर, 19 अगस्त (भाषा) ओडिशा के मलकानगिरी जिले की रहने वाली और ‘विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूह’ (पीवीटीजी) की चंपा रास्पेडा नीट-2025 परीक्षा उत्तीर्ण करने तथा बालासोर स्थित फकीर मोहन मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में दाखिला लेने वाली दिदायी आदिम समुदाय की पहली छात्रा हो गई हैं।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने छात्रा की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। चंपा, आदिवासी बहुल जिले के कोरुकोंडा ब्लॉक की नाकामामुडी पंचायत के अमलीबेड़ा गांव की रहने वाली हैं।
छात्रा के पिता लक्षमु रास्पेडा एक सीमांत किसान हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास (एसएसडी) विभाग के अंतर्गत नंदिनीगुडा (खैरपुट ब्लॉक) स्थित पीवीटीजी बालिका शिक्षा परिसर से प्राप्त की।
बाद में, उन्होंने एसएसडी गर्ल्स हाई स्कूल, चित्रकोंडा में अपनी पढ़ाई जारी रखी और 2019 में मैट्रिक की पढ़ाई पूरी की।
वर्ष 2021 में एसएसडी हायर सेकेंडरी स्कूल, गोविंदपल्ली से विज्ञान विषय में 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी बीएससी की पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
बयान में कहा गया है कि फिर भी डॉक्टर बनने का उनका उत्साह ठंडा नहीं पड़ा। चंपा, अपनी पूर्व विज्ञान शिक्षिका उत्कल केशरी दास के मार्गदर्शन में बालासोर में नि:शुल्क नीट कोचिंग कक्षाओं में शामिल हो गईं।
ओडिशा सरकार ने एक बयान में कहा कि राज्य में आदिवासी विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियां, विशेष रूप से चिकित्सा के क्षेत्र में, लगातार बढ़ रही हैं।
पिछले कुछ वर्षों में, कई आदिवासी विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की है और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए दाखिला लिया है।
ओडिशा के 13 पीवीटीजी में से एक, दिदायी जनजाति, मलकानगिरी जिले के सुदूर वन क्षेत्रों, विशेष रूप से कुडुमुलुगुम्मा और खैरपुट ब्लॉक में निवास करती है।
पांरपरिक रूप से, यह जनजातीय समूह झूम खेती (एक क्षेत्र में कुछ वर्षों तक खेती करने के बाद, उस क्षेत्र को छोड़ दिया जाता है और फिर दूसरे क्षेत्र में खेती की जाती है), वन उत्पाद संग्रहण और छोटे पैमाने पर खेती पर निर्भर है।
बयान में कहा गया है, ‘‘इस समुदाय (पीवीटीजी) की एक लड़की का बाधाओं को तोड़कर चिकित्सा पेशे में प्रवेश करना सशक्तीकरण और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है।’’
मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘उनकी कड़ी मेहनत, दृढ़ संकल्प और सफलता ओडिशा के सभी बच्चों को प्रेरित करेगी। मुझे उम्मीद है कि भविष्य में वह एक अच्छी डॉक्टर के रूप में गरीब और पिछड़े लोगों की सेवा करेंगी। मैं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।’’
भाषा सुभाष