रिसाव के चलते ‘एक्सिओम 4’ मिशन ‘विनाशकारी’ होता: इसरो प्रमुख
नेत्रपाल नरेश
- 19 Aug 2025, 06:39 PM
- Updated: 06:39 PM
हैदराबाद, 19 अगस्त (भाषा) इसरो प्रमुख वी नारायणन ने मंगलवार को कहा कि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ने भारत के शुभांशु शुक्ला और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को आईएसएस ले जाने वाले रॉकेट की मुख्य ‘फीड लाइन’ में दरार की पहचान की थी जिसके कारण प्रक्षेपण कार्यक्रम में बदलाव किया गया। उन्होंने कहा कि यदि इस समस्या के साथ मिशन जारी रहता तो यह एक ‘‘विनाशकारी विफलता’’ साबित होता।
उन्होंने बताया कि इस दरार के कारण ‘एक्सिओम-4’ मिशन (एक्स-4) को उसी महीने 11 जून के बजाय 25 जून के लिए स्थगित करना पड़ा था।
नारायणन ने यहां उस्मानिया विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा से पहले की घटनाओं का विवरण देते हुए कहा कि अमेरिका के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र में डेरा डाले भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की टीम को 10 जून को रॉकेट में खामी के बारे में पता चला, जिसके बाद भारतीय वैज्ञानिकों ने इस मुद्दे की विस्तृत पड़ताल करने को कहा।
अंतरिक्ष विभाग के सचिव नारायणन ने कहा, ‘‘कुल 14 प्रश्न पूछे गए थे और किसी भी प्रश्न का संतोषजनक उत्तर नहीं दिया गया, जिसमें यह भी शामिल था कि रिसाव कहां था। इसकी पहचान नहीं हो पाई। हमने संपूर्ण सुधार की मांग की, क्योंकि हम बहुत स्पष्ट थे। चूंकि मैं 40 वर्षों से उस क्षेत्र में काम कर रहा हूं, इसलिए मुझे पता है कि यदि कोई रॉकेट रिसाव के साथ उड़ान भरता है तो क्या कठिनाई होती है।’’
इसके बाद, भारत सरकार की मांग के आधार पर भारतीय टीम ने एक नोट प्रस्तुत किया और संपूर्ण रिसाव को ठीक कर दिया गया।
उन्होंने बताया कि भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा निरीक्षण किए जाने और मुख्य फीड लाइन में दरार पाए जाने पर 11 जून को निर्धारित पहला प्रक्षेपण रद्द कर दिया गया।
नारायणन ने कहा, ‘‘अगर रॉकेट (रिसाव के साथ) उड़ान भरता, तो यह एक विनाशकारी विफलता होती। भारतीयों के जोर देने, भारतीय शिक्षा प्रणाली और इसरो के प्रशिक्षण के कारण रॉकेट को ठीक किया गया। आज हमने न केवल शुभांशु शुक्ला, बल्कि उनके साथ तीन और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष यात्रियों का सुरक्षित मिशन पूरा किया है।’’
शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) की अपनी ऐतिहासिक यात्रा के बाद रविवार को भारत लौट आए। वह ‘एक्सिओम-4’ निजी अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा थे, जो 25 जून को फ्लोरिडा से रवाना हुआ था और 26 जून को आईएसएस पहुँचा था।
वह 15 जुलाई को तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों - पैगी व्हिटसन (अमेरिका), स्लावोज़ उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की (पोलैंड) और टिबोर कापू (हंगरी) के साथ पृथ्वी पर लौटे थे।
शुक्ला ने 18 दिन के मिशन के दौरान 60 से अधिक प्रयोग और 20 ‘आउटरीच’ सत्र आयोजित किए।
भाषा नेत्रपाल