स्वतंत्रता दिवस पर पाकिस्तानी नागरिकों को बधाई के लिए प्रोफेसर के खिलाफ मामला रद्द
आशीष माधव
- 08 Mar 2024, 06:10 PM
- Updated: 06:10 PM
नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अवधारणा के बारे में पुलिस तंत्र को जागरूक और शिक्षित करने का समय आ गया है। शीर्ष अदालत ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की आलोचना और पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर नागरिकों को बधाई देने के लिए एक प्रोफेसर के खिलाफ बंबई उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।
महाराष्ट्र पुलिस ने अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के संबंध में व्हाट्सऐप पर संदेश पोस्ट करने के लिए प्रोफेसर जावेद अहमद हाजम के खिलाफ कोल्हापुर के हतकणंगले थाने में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 ए (सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा देना) के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की थी। हाजम ने इन व्हाट्सऐप संदेशों में कहा था ‘‘पांच अगस्त-जम्मू-कश्मीर के लिए काला दिवस’’ और ‘‘14 अगस्त- पाकिस्तान को स्वतंत्रता दिवस मुबारक।’’
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा, ‘‘अब, समय आ गया है कि हमारे पुलिस तंत्र को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) द्वारा प्रदत्त बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अवधारणा तथा स्वतंत्र भाषण और अभिव्यक्ति पर उचित संयम की सीमा के बारे में जागरूक और शिक्षित किया जाए। उन्हें हमारे संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों के बारे में जागरूक बनाना होगा।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि यदि भारत का कोई नागरिक 14 अगस्त को पाकिस्तान के नागरिकों को शुभकामनाएं देता है, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। पाकिस्तान 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है।
पीठ ने कहा, ‘‘हमारा देश 75 वर्षों से अधिक समय से लोकतांत्रिक गणराज्य है। हमारे देश के लोग लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व को जानते हैं। यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है कि ये शब्द विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच वैमनस्य या शत्रुता बढ़ाएंगे और घृणा या द्वेष की भावनाओं को भड़काएंगे।’’
पीठ ने कहा कि केवल इसलिए कि कुछ व्यक्तियों में नफरत या दुर्भावना विकसित हो सकती है, आईपीसी की धारा 153-ए लगाना उचित नहीं होगा।
अदालत ने कहा कि आईपीसी की धारा 153-ए के तहत दंडनीय अपराध के लिए अपीलकर्ता के खिलाफ मुकदमा जारी रखना कानून की प्रक्रिया का ‘‘घोर दुरुपयोग’’ होगा।
पीठ ने इन टिप्पणियों के साथ बंबई उच्च न्यायालय के 10 अप्रैल, 2023 के संबंधित फैसले और प्राथमिकी को रद्द करने का आदेश दिया।
भाषा आशीष