उत्तर प्रदेश बजट सत्र: राज्यपाल के अभिभाषण के बीच महाकुंभ और उर्दू को लेकर सपा का विरोध प्रदर्शन
नोमान जोहेब
- 18 Feb 2025, 08:34 PM
- Updated: 08:34 PM
लखनऊ, 18 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन मंगलवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित करते हुए सरकार की उपलब्धियों को गिनाई, वहीं राज्य के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्यों ने विधान भवन में अंदर और बाहर विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
मंगलवार को विधानसभा में सपा सदस्यों के विरोध और नारेबाजी के बीच राज्यपाल ने अपना 40 पृष्ठ का अभिभाषण मात्र आठ मिनट 35 सेकंड में समाप्त कर दिया।
इस दौरान सपा के सदस्य हाथों में तख्तियां लिए विधानसभा अध्यक्ष के आसन के सामने आ गए और जब तक उन्होंने अभिभाषण पढ़ा, वे नारेबाजी करते रहे। बाद में राज्यपाल के अभिभाषण की प्रति सदन के पटल पर रखी गयी।
सपा सदस्यों के हाथों में तख्तियों पर ''राज्यपाल गो बैक'', ''राज्यपाल वापस जाओ'' के अलावा ''कुंभ में मौतों के आंकड़े हों जारी-सच छुपा रहे हैं ये अत्याचारी'' जैसे नारे लिखे थे।
राज्यपाल ने अभिभाषण में कहा, ''मेरी सरकार को इस वर्ष दिव्य एवं भव्य महाकुंभ के आयोजन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। महाकुंभ-2025 में स्वच्छता, सुरक्षा तथा सुव्यवस्था के नये मानक गढ़े हैं। महाकुंभ में आस्था एवं आधुनिकता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।''
महाकुंभ में 29 जनवरी को मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ का जिक्र करते हुए उन्होंने दुख प्रकट किया।
राज्यपाल ने कहा, ''मौनी अमावस्या पर एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना से हम सभी दुखी हैं। इसमें कुछ श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गये, जिसमें कुछ की मृत्यु हो गयी।''
राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान सपा सदस्य हंगामा करते रहे, नतीजतन विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन को साढ़े 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
पूर्वाह्न 11 बजे के बाद राज्यपाल ने अपना अभिभाषण पढ़ना शुरू किया था। इसके बाद दोबारा साढ़े 12 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई। अध्यक्ष ने क्षेत्रीय बोलियों में भी विधानसभा की कार्यवाही के प्रसारण की सूचना दी।
महाना ने मंगलवार को घोषणा की कि सदन की कार्यवाही का अनुवाद अंग्रेजी के साथ-साथ चार क्षेत्रीय भाषाओं अवधी, भोजपुरी, ब्रज और बुंदेलखंडी में भी उपलब्ध होगा। इस घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी ने उर्दू को भी इसमें शामिल करने की मांग की, जिस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जताई।
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने विधानसभा में अंग्रेजी के प्रयोग पर आपत्ति जताते हुए कहा, ''इस विधानसभा में अंग्रेजी का उपयोग न्यायोचित नहीं है।''
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि अंग्रेजी को आगे करके वह हिंदी को कमजोर कर रही है।
पांडेय ने कहा कि अगर विधानसभा में अंग्रेजी भाषा का उपयोग किया जा रहा है तो उर्दू का भी होना चाहिए।
पांडेय के इस बयान पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ''समाजवादियों का दोहरा आचरण है, वे अपने बच्चों को अंग्रेजी स्कूलों में भेजेंगे और यहां अंग्रेजी का विरोध करेंगे। इस प्रकार के विरोध की निंदा होनी चाहिए।''
योगी ने यह आरोप भी लगाया कि ''ये लोग उर्दू पढ़ाकर (दूसरे के बच्चों को) मौलवी बनाना चाहते हैं। यह कतई स्वीकार नहीं होगा।''
दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष महाकुंभ भगदड़ पर चर्चा कराने पर जोर दे रहे थे लेकिन अध्यक्ष महाना ने बुधवार पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए सदन स्थगित कर दिया।
बजट सत्र का पहला दिन हंगामेदार रहा और दोनों पारियों को मिलाकर एक घंटे तक भी कार्यवाही नहीं चली।
इसी बीच, विधानसभा अध्यक्ष ने अयोध्या जिले के मिल्कीपुर क्षेत्र के उपचुनाव में जीत हासिल करने वाले भारतीय जनता पार्टी के चंद्रभानु पासवान को विधानसभा सदस्यता की शपथ दिलाई
पासवान ने पिछले दिनों हुए उपचुनाव में सपा के सांसद अवधेश प्रसाद के बेटे व सपा उम्मीदवार को अजित प्रसाद को 60 हजार से अधिक मतों से हराया।
बजट सत्र से पहले सदन से बाहर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारों से बातचीत में विपक्ष खासतौर से समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, ''हम उम्मीद करते हैं कि हार की हताशा से परेशान विपक्ष अपनी कुंठा सदन पर नहीं उतारेगा, बल्कि सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से संचालित करने में सकारात्मक योगदान करेगा।''
उधर, कुंभ और राज्य की कानून-व्यवस्था समेत तमाम मुद्दों को लेकर सपा सदस्यों ने विधान भवन के मुख्य द्वार पर लगी पूर्व प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के समक्ष धरना देकर सरकार विरोधी नारे लगाये और प्रदर्शन किया।
सपा सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार महाकुंभ में मरने वालों के आंकड़े छिपा रही है।
इस बीच एक बयान जारी कर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राज्यपाल के अभिभाषण की आलोचना करते हुए कहा कि कुंभ में घोर अव्यवस्था को दिव्य भव्य व्यवस्था का नाम देकर उन तमाम श्रद्धालुओं का अपमान किया है जिनकी जानें सरकारी कुव्यवस्था ने ले ली।
वहीं उप्र के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सदन से बाहर पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी सदन में राज्यपाल का स्वागत करने के बजाय हमेशा विरोध प्रदर्शन करती है और उसे हंगामा करने की आदत हो गई है।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सदस्य शिवपाल सिंह यादव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “मुख्यमंत्री जी असली दोहरा चरित्र तो आपकी सरकार का है जो खुद अरबों रुपये कार्यक्रमों और प्रचार पर खर्च करती है, लेकिन गरीबों के बच्चे की शिक्षा का बजट काट देती है।”
उन्होंने कहा कि “आपको उर्दू से इतनी परेशानी क्यों है ? क्या संविधान में हर भाषा को सम्मान देने की बात नहीं कही गई!”
यादव ने कहा “समाजवादियों ने हमेशा सबको साथ लेकर चलने की राजनीति की है न कि नफरत फैलाने की।”
भाषा आनन्द
नोमान