शराब माफिया के हितों की रक्षा के लिए ‘आप’ का अंधा लगाव: आतिशी के शराब नीति की वकालत पर भाजपा
ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र नोमान
- 16 Jan 2025, 08:02 PM
- Updated: 08:02 PM
नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रद्द की जा चुकी दिल्ली आबकारी नीति को मुख्यमंत्री आतिशी द्वारा फिर से लागू करने की वकालत करने को लेकर बृहस्पतिवार को आम आदमी पार्टी (आप) पर निशाना साधा और कहा कि शराब माफिया के हितों की रक्षा के लिए पार्टी की राजनीति का ‘अंधा लगाव’ भारतीय राजनीति में ‘काला अध्याय’ बना रहेगा।
आतिशी ने समाचार चैनल ‘टीवी9 भारतवर्ष’ के साथ एक साक्षात्कार में राष्ट्रीय राजधानी में विवादास्पद दिल्ली आबकारी नीति लागू करने का पक्ष लेते हुए कहा था कि यह एक ‘बेहतर’ नीति है, जिसे कई राज्यों ने अपनाया है और इसके लागू होने से उनके राजस्व में काफी वृद्धि हुई है।
आतिशी की टिप्पणी का हवाला देते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अगर उक्त आबकारी नीति दिल्ली में लागू की जाती है तो इसे देश के इतिहास में ‘शर्म’ के रूप में दर्ज किया जाएगा।
उन्होंने आतिशी की टिप्पणी को दुखद करार दिया और ‘आप’ पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या शराब अन्ना हजारे के जनांदोलन से ‘नैतिकता का प्रचार’ करने वाली पार्टी की पहली प्राथमिकता बन गई है।
प्रसाद ने कहा, ‘‘शराब माफिया के हितों की रक्षा के लिए ‘आप’ की राजनीति का अंधा लगाव भारतीय राजनीति में एक काला अध्याय बना रहेगा।’’
भाजपा के आरोप पर ‘आप’ की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
प्रसाद ने आरोप लगाया कि अगर ‘आप’ सत्ता में वापस आती है तो वह शराब नीति लागू करने पर विचार करेगी जबकि इसी घोटाले के सिलसिले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य गिरफ्तार किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मामले में अभियोजन (आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने) की मंजूरी भी दी गई है... फिर शराब ठेकेदारों का क्या दबाव है और उनके साथ क्या समझौता हुआ जो वह (आतिशी) कह रही हैं कि सत्ता में वापस आने के बाद नीति को फिर से लागू किया जाएगा।’’
यह पूछे जाने पर कि तमाम विवादों के बावजूद क्या रद्द की जा चुकी दिल्ली की शराब नीति शहर में फिर से लागू होनी चाहिए, आतिशी ने टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में हाथ में तख्तियां लेकर 'हां' में जवाब दिया था।
उन्हें यूट्यूब पर उक्त चैनल द्वारा पोस्ट किए गए अपने साक्षात्कार के वीडियो में यह कहते हुए सुना गया, ‘‘कई राज्यों ने इस नीति को अपनाया है। उन राज्यों का राजस्व, जो उत्पाद शुल्क के माध्यम से आता है, में भी बहुत वृद्धि हुई है। और वास्तव में, आवंटन में पारदर्शिता भी बढ़ी है (नीति के कार्यान्वयन के साथ)।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या विवादों के बावजूद इसे लागू किया जाना चाहिए, उन्होंने कहा, ‘‘यह नीति एक बेहतर नीति है।’’
भाषा ब्रजेन्द्र ब्रजेन्द्र