न्यायालय ने पुराने वाहनों से संबंधित निपटान नीति के खिलाफ याचिका पर विचार से इनकार किया
नेत्रपाल दिलीप
- 25 Oct 2024, 08:30 PM
- Updated: 08:30 PM
नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार की उस नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें क्रमशः 10 साल और 15 साल से अधिक पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों को हटाने का प्रावधान है।
न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने याचिकाकर्ता नागलक्ष्मी लक्ष्मी नारायणन से कहा कि वह उचित प्राधिकार के समक्ष अभिवेदन दायर करें और उचित कानूनी रास्ता अपनाएं।
नारायणन ने पुराने वाहनों को हटाने से संबंधित दिल्ली सरकार की 2024 नीति को चुनौती दी थी।
शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, ‘‘आप किसी हस्तक्षेप आवेदन में दिशा-निर्देशों को कैसे चुनौती दे सकते हैं? आप एक अलग याचिका के जरिए दिशा-निर्देशों को चुनौती दे सकते हैं। इस मुद्दे को इस अदालत ने खारिज कर दिया था और इन वाहनों के संबंध में हमारे आदेश को बरकरार रखा गया था। हम किसी हस्तक्षेप आवेदन में एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के निर्देश से छेड़छाड़ नहीं कर सकते। जब तक एनजीटी के आदेश में संशोधन नहीं होता, हम कुछ नहीं कर सकते या आदेश को स्पष्ट नहीं कर सकते।’’
शीर्ष अदालत ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में प्रदूषण रोकथाम संबंधी एमसी मेहता मामले में याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और प्रतिकूल आदेश पारित होने पर उन्हें अदालत का रुख करने की स्वतंत्रता दी।
याचिकाकर्ता ने एनजीटी के 2015 के आदेश के अनुपालन में दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों पर पुराने वाहनों से निपटने संबंधी 20 फरवरी, 2024 को जारी दिल्ली सरकार के दिशा-निर्देशों को चुनौती दी थी।
याचिका में कहा गया था, ‘‘आवेदक ने एनजीटी के 2015 के आदेश से पहले वाहन खरीदा था और पूर्ण कर तथा पंजीकरण शुल्क का भुगतान किया। 2015 के आदेश से पहले खरीदे गए वाहनों पर दिशा-निर्देशों को पूर्व की तिथि से लागू करना मनमाना है और यह आवेदक को संविधान के अनुच्छेद 300 ए के तहत प्रदत्त संपत्ति के अधिकार से वंचित करता है।’’
याचिका में तर्क दिया गया कि एनजीटी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि नियम पूर्वव्यापी ढंग से लागू होगा या आदेश की तारीख के बाद से लागू होगा।
वर्ष 1985 में राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में प्रदूषण की रोकथाम के लिए निर्देश दिए जाने का आग्रह करते हुए दायर एम सी मेहता मामले में नारायणन ने हस्तक्षेप आवेदन दायर किया था।
भाषा नेत्रपाल