राजकोट गेम जोन मामले में सत्र अदालत ने चार आरोपियों की नियमित जमानत याचिका खारिज की
आशीष नरेश
- 30 Sep 2024, 05:51 PM
- Updated: 05:51 PM
राजकोट, 30 सितंबर (भाषा) गुजरात के राजकोट में टीआरपी गेम जोन में लगी आग के मामले में एक सत्र अदालत ने तीन निलंबित निकाय अधिकारियों सहित चार आरोपियों की नियमित जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी। राजकोट में 25 मई को गेम जोन में अग्नि त्रासदी में 27 लोगों की जान चली गई थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ई एस सिंह की अदालत ने निलंबित मुख्य अग्निशमन अधिकारी इलेश खेर, निलंबित सहायक नगर नियोजन अधिकारी गौतम जोशी और राजेश मकवाना के साथ-साथ अशोक जड़ेजा की जमानत याचिका खारिज कर दी। मामले के 13 आरोपियों में से चार ने नियमित जमानत के लिए याचिका दायर की थी।
विशेष लोक अभियोजक तुषार गोकानी ने आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत मामला बताते हुए विभिन्न आधार पर याचिका का विरोध किया। गोकानी ने अदालत को बताया कि आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ मजबूत वैज्ञानिक और दस्तावेजी सबूत हैं जो फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला के निष्कर्षों द्वारा समर्थित हैं।
गोकानी ने अपनी दलील में यह भी कहा कि घटनास्थल पर मौजूद कुछ गवाह आरोपियों से प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि वे छोटे विक्रेता हैं।
मामले की जांच करने वाली शहर की अपराध शाखा ने कहा है कि प्लास्टिक और लकड़ी के लिए इंसुलेटर के रूप में उपयोग की जाने वाली फोम शीट जैसी अत्यधिक ज्वलनशील निर्माण सामग्री के कारण आग 3-4 मिनट के भीतर फैल गई और पूरे ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया।
सीसीटीवी कैमरे के फुटेज से पता चला कि भूतल पर वेल्डिंग के काम के दौरान थर्माकोल (पॉलीस्टाइन) शीट पर चिंगारी गिरने से आग लग गई। हालांकि वहां मौजूद कर्मचारियों ने आग बुझाने वाले यंत्रों से आग पर काबू पाने की कोशिश की, लेकिन यह तेजी से फैल गई और अंततः गेम जोन को भी अपनी चपेट में ले लिया।
इन चार आरोपियों के अलावा, गिरफ्तार किए गए अन्य लोग गेम जोन के सह-मालिक धवल ठक्कर, युवराजसिंह सोलंकी, राहुल राठौड़, नितिन लोढ़ा और किरीटसिंह जडेजा, वेल्डिंग ठेकेदार महेश राठौड़, निलंबित नगर नियोजन अधिकारी एमडी सगाथिया, सहायक टीपीओ मुकेश मकवाना, कलावड रोड अग्निशमन केंद्र के पूर्व अधिकारी रोहित विगोरा, सहायक नगर नियोजन अधिकारी राजेश मकवाना और सहायक अभियंता जयदीप चौधरी शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, गेम जोन राजकोट नगर निगम के अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के बिना संचालित किया जा रहा था।
भाषा आशीष