टीएमसी ने महुआ के परिसरों पर छापेमारी को ‘प्रतिशोध की राजनीति’ बताया, भाजपा का पलटवार
आशीष पवनेश
- 23 Mar 2024, 09:50 PM
- Updated: 09:50 PM
कोलकाता, 23 मार्च (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने कथित रूप से धन लेकर सवाल पूछने के मामले में पार्टी नेता महुआ मोइत्रा के परिसरों पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की छापेमारी को ‘‘प्रतिशोध की राजनीति’’ बताया है।
अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई ने शनिवार को मामले में कोलकाता सहित कई स्थानों पर टीएमसी की पूर्व सांसद मोइत्रा के परिसरों में तलाशी ली।
अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई की टीम शनिवार तड़के कोलकाता और अन्य शहरों में महुआ के ठिकानों पर पहुंची और छापेमारी की प्रक्रिया की जानकारी देकर कार्रवाई शुरू की।
मोइत्रा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘मैंने सुना है कि सीबीआई मेरे परिसरों पर छापेमारी कर रही है। मैंने प्राथमिकी नहीं देखी है, इसलिए आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकती। फिलहाल मैं कुछ नहीं कहना चाहती।’’
टीएमसी के वरिष्ठ नेता शांतनु सेन ने कहा, ‘‘यह विभिन्न ज्वलंत मुद्दों से जनता और मीडिया का ध्यान भटकाने का हथकंडा है। ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा बढ़ते जन असंतोष को महसूस कर रही है और वे विमर्श को बदलने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। यह प्रतिशोध की राजनीति का स्पष्ट उदाहरण है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष को डराने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। सेन ने कहा, ‘‘आदर्श आचार संहिता लागू होने के बीच भाजपा अपनी सबसे भरोसेमंद सहयोगियों-सीबीआई और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) को हमारे उम्मीदवारों पर छापा मारने के लिए भेज रही है। निर्वाचन आयोग को इस पर गौर करना चाहिए।’’
भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘जब भी ईडी या सीबीआई टीएमसी नेताओं पर छापा मारती है, तो वे इसे राजनीति से प्रेरित होने का आरोप लगाते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मोइत्रा ने जो कुछ भी किया वह लोकतंत्र के लिए शर्म की बात है। वास्तविकता यह है कि टीएमसी भ्रष्टाचार में डूबी हुई है, पार्टी का लगभग हर नेता भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहा है।’’
संसदीय समिति द्वारा धन लेकर सवाल पूछने के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद मोइत्रा को पिछले साल लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया था। मोइत्रा ने कहा था कि संसद में उनकी आवाज दबाने के लिए प्रतिशोध की राजनीति के तहत उन्हें निष्कासित किया गया।
भाषा आशीष