कोलकाता: अस्पताल के पूर्व प्राचार्य ने उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया
सुरेश शफीक
- 04 Sep 2024, 08:22 PM
- Updated: 08:22 PM
नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया है, जिसमें उनके कार्यकाल के दौरान संस्थान में वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाने वाली याचिका में पक्षकार के रूप में शामिल किए जाने की उनकी याचिका खारिज कर दी गयी है।
उच्च न्यायालय ने कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने का 23 अगस्त को आदेश दिया था।
उच्च न्यायालय का 23 अगस्त का आदेश अस्पताल के पूर्व उपाधीक्षक अख्तर अली की याचिका पर आया था, जिन्होंने घोष के कार्यकाल के दौरान अस्पताल में कथित वित्तीय कदाचार की प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच का अनुरोध किया था।
उच्च न्यायालय ने याचिका में पक्षकार के रूप में शामिल किए जाने के घोष के अनुरोध को भी खारिज कर दिया था और कहा था कि वह मामले में ‘‘आवश्यक पक्षकार’’ नहीं थे।
इसने अपने आदेश में कहा था, "...उपरोक्त आरोपों और घटना के बीच स्पष्ट संबंध के मद्देनजर तथा इस बात पर विचार करते हुए कि मामले (अस्पताल में डॉक्टर से बलात्कार और उसकी हत्या) की जांच पहले ही सीबीआई को सौंपी जा चुकी है, एक व्यापक और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इस मामले की भी जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए।’’
सीबीआई ने दो सितंबर को संबंधित अस्पताल में कथित वित्तीय कदाचार के आरोपों को लेकर घोष और तीन अन्य को गिरफ्तार किया।
घोष ने अपने वकील सिद्धार्थ चौधरी के माध्यम से उच्च न्यायालय के 23 अगस्त के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड की गई छह सितंबर की वाद सूची के अनुसार, उनकी याचिका पर प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ को सुनवाई करनी है।
उच्च न्यायालय के समक्ष पूर्व प्राचार्य के वकील ने अपने मुवक्किल का बचाव करने का अवसर दिए जाने का अनुरोध किया था, क्योंकि पूर्व उपाधीक्षक ने उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे।
शीर्ष अदालत ने अस्पताल में चिकित्सक के साथ बलात्कार और हत्या के मामले को 20 अगस्त को "भयावह" करार दिया था तथा डॉक्टरों एवं अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक प्रोटोकॉल तैयार करने हेतु 10-सदस्यीय राष्ट्रीय कार्य बल के गठन सहित कई निर्देश जारी किए थे।
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