निलंबन के खिलाफ डब्ल्यूएफआई की याचिका पर जवाब देने के लिए उच्च न्यायालय ने केंद्र को और समय दिया
नेत्रपाल वैभव
- 28 Aug 2024, 07:03 PM
- Updated: 07:03 PM
नयी दिल्ली, 28 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब देने के लिए केंद्र को बुधवार को चार सप्ताह का समय और दे दिया।
केंद्र ने निर्णय लेने में स्वयं के संविधान के प्रावधानों का कथित तौर पर पालन नहीं करने को लेकर नए पदाधिकारी चुने जाने के तीन दिन बाद 24 दिसंबर, 2023 को डब्ल्यूएफआई को निलंबित कर दिया था और आईओए से इससे संबंधित मामलों के प्रबंधन के लिए एक तदर्थ समिति गठित करने का अनुरोध किया था।
केंद्र ने उस याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय और मांगा, जो पहली बार अप्रैल में सुनवाई के लिए आई थी। केंद्र ने कहा कि वह पिछले साल डब्ल्यूएफआई में हुए चुनाव को चुनौती देने वाली कुछ पहलवानों की याचिका पर उच्च न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहा था।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि केंद्र को अदालत के पहले के निर्देशों की ‘‘परवाह’’ नहीं है, जिनमें उसे जवाब दाखिल करने के लिए कहा गया था।
याचिकाकर्ता ने कहा कि अनिश्चितकालीन निलंबन का आदेश कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना दिया गया था। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से इस स्तर पर एक अंतरिम आदेश पारित करने का आग्रह किया।
हालांकि, न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने कहा कि दलीलें पूरी हुए बिना अंतरिम आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
न्यायाधीश ने कहा, ‘‘यहां अंतरिम आदेश देने का कोई सवाल ही नहीं है। दलीलों के बिना, मैं ऐसा नहीं कर सकता।’’
अदालत ने कहा, ‘‘काफी समय बीत चुका है। फिर भी दलीलें पूरी नहीं हुई हैं। प्रतिवादी के वकील ने कहा है कि जवाब चार सप्ताह में दाखिल किया जाएगा।’’
इसने मामले को अक्टूबर में आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए अधिकारियों से मामले से संबंधित प्रासंगिक रिकॉर्ड भी लाने को कहा।
फरवरी में, ‘यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग’ (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) ने डब्ल्यूएफआई से निलंबन हटा दिया, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने भी 18 मार्च को कुश्ती के लिए अपनी तदर्थ समिति को भंग कर दिया।
सोलह अगस्त को, उच्च न्यायालय की एकल न्यायाधीश पीठ ने पहलवान बजरंग पूनिया, विनेश फोगट, साक्षी मलिक और उनके पति सत्यव्रत कादियान की याचिका पर भारतीय कुश्ती महासंघ के लिए आईओए की तदर्थ समिति के अधिकार को बहाल कर दिया।
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