दिल्ली उच्च न्यायालय में वक्फ सूची से 123 संपत्तियों को हटाने के खिलाफ फरवरी में सुनवाई
धीरज माधव
- 27 Aug 2024, 08:40 PM
- Updated: 08:40 PM
नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय केंद्र द्वारा दिल्ली वक्फ बोर्ड से 123 संपत्तियों को वापस लेने के खिलाफ दाखिल याचिका पर अगले साल 17 फरवरी को सुनवाई करेगा।
अदालत ने मंगलवार को मामले को अगले साल के फरवरी महीने में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कुमार कौरव की अदालत ने वक्फ बोर्ड के साथ-साथ केंद्र सरकार से कहा कि वह इस दौरान मामले में अपनी-अपनी दलीलें पूरी कर लें।
पिछले वर्ष, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) ने दो सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तानों सहित दिल्ली वक्फ बोर्ड की 123 संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेने का निर्णय लिया था।
उप भूमि एवं विकास अधिकारी ने आठ फरवरी 2023 को बोर्ड के अध्यक्ष अमानतुल्लाह खान को पत्र लिखकर संपत्तियों से संबंधित सभी मामलों से उसे मुक्त करने के फैसले की जानकारी दी।
दिल्ली वक्फ बोर्ड के मुताबिक उक्त संपत्ति हमेशा से उसके पास थी और केंद्र के पास उसे उनसे ‘मुक्त’ करने का अधिकार नहीं है।
वक्फ बोर्ड ने उसकी संपत्तियों की सूची से उक्त संपत्तियों को हटाने पर विचार करने के लिए केंद्र द्वारा दो सदस्यीय समिति गठित करने के फैसले को भी चुनौती दी है। जबकि इसी मुद्दे पर 2017 में एक सदस्यीय समिति ने रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
उच्च न्यायालय ने मई 2023 में केंद्र को दिल्ली वक्फ बोर्ड से ली गई 123 संपत्तियों का निरीक्षण करने की अनुमति दे दी साथ ही सुनिश्चित किया कि निकाय के दैनिक कामकाज में न्यूनतम व्यवधान पैदा हो।
केंद्र की ओर से पेश अधिवक्ता ने मंगलवार को कहा कि इस समय सर्वेक्षण कार्य चल रहा है।
न्यायधीश ने मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी की ओर से दाखिल याचिका पर भी केंद्र को नोटिस जारी किया और लंबित कई आवेदनों का निस्तारण कर दिया जिसमें अंतरिम राहत देने और यथास्थिति बहाल करने का अनुरोध किया गया था।
केंद्र ने इससे पहले वक्फ बोर्ड द्वारा 123 संपत्तियों को केंद्र की ओर से वापस लेने के फैसले को चुनौती देने के वास्ते दाखिल याचिका का विरोध किया। केंद्र ने दलील दी कि उक्त संपत्तियों को कई साल पहले भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के तहत अधिग्रहीत किया गया।
केंद्र ने अपने जवाब में कहा कि इन सभी 123 संपत्तियों को 1911 से 1914 के बीच भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत अधिग्रहीत किया गया था और मुआवजा दिया जा चुका है और स्वामित्व में उसके पक्ष में बदलाव किया जा चुका है।
भाषा धीरज