केरल सरकार हेमा समिति की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करे : उच्च न्यायालय
धीरज नेत्रपाल
- 22 Aug 2024, 06:17 PM
- Updated: 06:17 PM
कोच्चि, 22 अगस्त (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह मलयालम फिल्म उद्योग में महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़ी हेमा समिति की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में पेश करे।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ए मोहम्मद मुस्ताक और न्यायमूर्ति एस. मनु की पीठ ने यह निर्देश तिरुवनंतपुरम निवासी नवास द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में दावा किया गया है कि रिपोर्ट में गंभीर आरोप हैं।
उच्च न्यायालय ने रिट याचिका स्वीकार करते हुए सरकार को जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।
अदालत ने सरकार से पूछा कि हेमा समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर उसकी अगली कार्रवाई क्या होगी। इस पर सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि जब तक कोई शिकायत दर्ज नहीं कराता, तब तक मामला दर्ज करना संभव नहीं है।
राज्य सरकार ने कहा कि उसके पास बिना सेंसर की गई मूल रिपोर्ट में उल्लिखित सभी नाम हैं, जो एक गोपनीय दस्तावेज है।
इसमें कहा गया कि समिति को फिल्म उद्योग में महिलाओं की स्थिति का अध्ययन करने और रिपोर्ट देने का काम सौंपा गया था, लेकिन सरकार के पास मामले दर्ज करने की सीमाएं हैं क्योंकि समिति द्वारा गोपनीयता सुनिश्चित करने के बाद बयान दर्ज किए गए थे।
सरकार ने कहा कि गोपनीयता संबंधी बयान के मद्देनजर मामला दर्ज करना संभव नहीं है। अधिवक्ता ने कहा कि अगर कोई आगे आकर शिकायत दर्ज कराएगा तो मामला दर्ज किया जाएगा।
उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को इस मामले में राज्य महिला आयोग को भी पक्षकार बनाया।
जनहित याचिका में मूल रिपोर्ट सार्वजनिक करने का अनुरोध किया गया है तथा उच्च न्यायालय से अनुरोध किया गया है कि वह राज्य सरकार को रिपोर्ट में उल्लिखित कथित यौन अपराधों के संबंध में आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दे।
न्यायमूर्ति के. हेमा समिति का गठन 2017 में अभिनेता दिलीप से जुड़े अभिनेत्री हमला मामले के बाद मलयालम सिनेमा में यौन उत्पीड़न और लैंगिक असमानता के मुद्दों का अध्ययन करने के लिए किया गया था। समिति ने अपनी रिपोर्ट 2019 में जमा की थी, लेकिन सरकार ने विवरण जारी नहीं किया क्योंकि इसमें संवेदनशील जानकारी होने का संदेह था।
भाषा धीरज