नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिणाम सामने आने लगे हैं: राष्ट्रपति मुर्मू
अमित रंजन
- 14 Aug 2024, 09:07 PM
- Updated: 09:07 PM
नयी दिल्ली, 14 अगस्त (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि युवाओं के मनो-मस्तिष्क को विकसित करना और परंपरा एवं समकालीन ज्ञान के सर्वश्रेष्ठ आयामों को ग्रहण करने वाली नयी मानसिकता का निर्माण करना प्राथमिकता है तथा इस संदर्भ में, वर्ष 2020 से लागू की गई नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिणाम सामने आ रहे हैं।
मुर्मू ने 78वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि आज के युवा देश के स्वतंत्रता की शताब्दी तक के ‘अमृत काल’ को यानी आज से लगभग एक चौथाई सदी के कालखंड को स्वरूप प्रदान करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘उनकी ऊर्जा और उत्साह के बल पर ही हमारा देश नयी ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। युवाओं के मनो-मस्तिष्क को विकसित करना और परंपरा एवं समकालीन ज्ञान के सर्वश्रेष्ठ आयामों को ग्रहण करने वाली नयी मानसिकता का निर्माण करना हमारी प्राथमिकता है। इस संदर्भ में, वर्ष 2020 से लागू की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के परिणाम सामने आ रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि युवा प्रतिभा का समुचित उपयोग करने के लिए, सरकार ने कौशल, रोजगार और अन्य अवसरों को सुलभ बनाने के लिए पहल की है।
उन्होंने कहा, ‘‘रोजगार और कौशल के लिए प्रधानमंत्री की पांच योजनाओं के माध्यम से पांच वर्षों में चार करोड़ दस लाख युवाओं को लाभ मिलेगा। सरकार की एक नयी पहल से पांच वर्षों में एक करोड़ युवा अग्रणी कंपनियों में ‘इंटर्नशिप’ करेंगे। ये सभी कदम, विकसित भारत के निर्माण में आधारभूत योगदान देंगे।’’
वर्ष 2020 में घोषित की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने 1986 में अपनाई गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का स्थान लिया।
नयी नीति में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम को सभी विद्यालयों में लागू करने की वकालत की गई है - कक्षा 1 से कक्षा 8 के बजाय प्री-स्कूल से कक्षा 12 तक। यह वर्तमान 10+2 मॉडल के बजाय 5+3+3+4 के फॉर्मूले पर स्कूली शिक्षा प्रणाली को फिर से तैयार करता है।
तीन-आठ वर्ष की आयु के छात्र ‘फाउंडेशन स्टेज’ का हिस्सा होंगे, 8-11 वर्ष की आयु के छात्र प्रारंभिक स्कूली शिक्षा का हिस्सा होंगे, 11-14 वर्ष की आयु के छात्र मिडिल स्कूल और 14-18 वर्ष की आयु के छात्र माध्यमिक स्तर का हिस्सा होंगे।
भाषा अमित