अदालत ने संजय राउत की ओर से कारोबारी के खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार मामले में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ स्वीकार की
आशीष पवनेश
- 08 Aug 2024, 08:00 PM
- Updated: 08:00 PM
मुंबई, आठ अगस्त (भाषा) मुंबई की एक विशेष अदालत ने कारोबारी जितेंद्र नवलानी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर विभिन्न कंपनियों से 58.96 करोड़ रुपये से अधिक कथित रूप से स्वीकार करने के मामले में भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दायर ‘क्लोजर रिपोर्ट’ स्वीकार कर ली है।
महाराष्ट्र पुलिस के भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो ने अप्रैल 2022 में शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत की शिकायत पर नवलानी के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। राज्यसभा सदस्य राउत ने ईडी अधिकारियों पर नवलानी की मदद से जबरन वसूली का रैकेट संचालित करने का आरोप लगाया था।
विशेष एसीबी अदालत के न्यायाधीश ए ए नंदगांवकर ने बुधवार को एसीबी की रिपोर्ट स्वीकार कर ली।
‘सी-समरी’ रिपोर्ट तब दाखिल की जाती है जब पुलिस जांच में यह निष्कर्ष निकालती है कि गलत तथ्यों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
एसीबी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि शिकायत के अनुसार, नवलानी ने वित्तीय वर्ष 2015 से 2021 के दौरान अपने व्यक्तिगत और कंपनी बैंक खातों में 39 निजी कंपनियों के माध्यम से कुल 58.96 करोड़ रुपये प्राप्त किए थे।
एसीबी ने कहा कि जांच से पता चला कि ये लेन-देन इन 39 निजी कंपनियों और नवलानी के बीच नियमित व्यापारिक लेनदेन से संबंधित थे। इसलिए, ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि नवलानी ने इन धनराशियों को अवैध रूप से प्राप्त करने के लिए अपने पद या प्रभाव का दुरुपयोग किया।
एसीबी की रिपोर्ट में कहा गया कि राउत ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया कि वह कथित कदाचार में किसी भी ईडी अधिकारी की संलिप्तता से अनभिज्ञ थे।
इसके अलावा, शिकायतकर्ता ने एसीबी को दिए गए बयान में कहा कि 39 कंपनियों में से किसी ने भी वास्तव में कारोबारी के आचरण के बारे में उससे शिकायत नहीं की थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि राउत ने यह भी कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि क्या नवलानी ने निजी कंपनियों से धन प्राप्त करने के लिए ईडी अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल किया था।
इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि ईडी या उसके अधिकारियों का 39 कंपनियों द्वारा नवलानी को भुगतान की गई कुल 58.96 करोड़ रुपये की राशि से कोई संबंध नहीं था।
भाषा आशीष