अदालत ने महाराष्ट्र की जेलों में ‘ई-मुलाकात’ व वीडियो कॉन्फ्रेंस सुविधा का विवरण मांगा
नोमान सुभाष
- 07 Aug 2024, 04:21 PM
- Updated: 04:21 PM
मुंबई, सात अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र सरकार से राज्य भर की जेलों में ‘ई-मुलाकात’ और वीडियो कॉन्फ्रेंस सुविधाओं के बारे में जानकारी मांगी है।
न्यायमूर्ति भारती डांगरे की एकल पीठ ने दो अगस्त को इस बारे में आंकड़े मांगे कि पिछले छह महीनों में कितने आरोपियों को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अदालतों में पेश किया गया और कितने लोगों को अदालत में ले जाकर पेश किया गया।
‘ई-मुलाकात’ सुविधा के तहत कैदियों को अपने परिवारों से वीडियो कॉल करने की अनुमति होती है।
उच्च न्यायालय ने राज्यभर की अदालत और जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुविधा उपलब्ध न होने के मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लिया है।
यह मुद्दा त्रिभुवन सिंह यादव द्वारा दायर जमानत याचिका में उठाया गया था। याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि अधीनस्थ अदालत में उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई 23 बार स्थगित की गई थी क्योंकि उसे न तो अदालत ले जाया गया न ही वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अदालत में पेश किया गया।
उच्च न्यायालय ने पहले कहा था कि सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध करानी चाहिए कि राज्यभर की सभी जेलों और अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुविधा हो ताकि आरोपियों को डिजिटल माध्यम से अदालत में पेश किया जा सके।
पीठ ने दो अगस्त को राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट पर संज्ञान लिया, जिसमें जिला अदालतों में वीडियो कॉन्फ्रेंस कैमरों की व्यवस्था के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, अबतक 1,406 अदालतों को ऑडियो/वीडियो मंच उपलब्ध नहीं कराया गया है।
पीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि वह इस बारे में आंकड़े प्रस्तुत करे कि राज्य की जेलों से पिछले छह महीनों में कितने आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश किया गया और कितने आरोपियों को अदालत ले जाकर पेश किया गया।
सरकार को ठाणे की जेलों, मुंबई की आर्थर रोड जेल और भयखला महिला जेल, नवी मुंबई की तलोजा जेल, अधारवाड़ी (कल्याण), यरवदा (पुणे), कोल्हापुर और नासिक की जेलों के आंकड़े देने का निर्देश दिया गया है।
अदालत ने कहा, “इसके अलावा, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इन जेलों में ‘ई-मुलाकात’ की सुविधा किस हद तक उपलब्ध कराई गई है।”
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त के लिए निर्धारित की है।
भाषा नोमान