गणेश चतुर्थी में एक महीना बचा, ‘राशन किट’ योजना के लिए निविदा प्रक्रिया रद्द नहीं कर सकते: अदालत
जितेंद्र रंजन
- 05 Aug 2024, 08:50 PM
- Updated: 08:50 PM
मुंबई, पांच अगस्त (भाषा) बम्बई उच्च न्यायालय ने गणेश उत्सव के लिए एक योजना के तहत 1.7 करोड़ लाभार्थियों को सब्सिडी वाली ‘राशन किट’ वितरित करने की महाराष्ट्र सरकार की निविदा प्रक्रिया को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं को सोमवार को खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि गणेश चतुर्थी में बस एक महीना बाकी है और इस समय इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप जनहित के खिलाफ होगा।
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति अमित बोरकर की खंडपीठ ने कहा कि 10 दिनों तक चलने वाले उत्सव के दौरान ‘आनंदचा सिद्ध’ योजना के तहत लगभग 1.7 करोड़ राशन किट की आपूर्ति एक बहुत बड़ा काम है हालांकि याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं में दम है।
अदालत ने कहा, “मामले के तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुए, खासकर निविदा के चरण और राशन किटों की समय पर सुचारू आपूर्ति व वितरण सुनिश्चित करने के लिए बचे कम समय को देखते हुए हमें लगता है कि इस मामले में किसी भी तरह के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।”
पीठ ने राज्य सरकार को निविदा प्रक्रिया को अंतिम रूप न देने का निर्देश देते हुए पहले दी गई अंतरिम सुरक्षा को बढ़ाने से भी इनकार कर दिया।
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि जनहित सबसे पहले है और निविदा मामले में हस्तक्षेप करने से पहले अदालत को यह ध्यान में रखना चाहिए। कुछ कंपनियों ने निविदा प्रक्रिया में लागू की गई कुछ शर्तों को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था।
पीठ ने कहा, “(योजना के तहत) राशन किटों की आपूर्ति गौरी गणपति उत्सव के दौरान की जानी है। यह उत्सव पूरे महाराष्ट्र में मनाया जाता है। यह उत्सव सात सितंबर से शुरू होना है। आपूर्ति की जाने वाली राशन किटों की मात्रा 1,70,82,086 है, जो एक बहुत बड़ी संख्या है।”
न्यायालय ने कहा कि गणेश चतुर्थी में बमुश्किल एक महीना बचा है और इसलिए जब तक अदालत को निविदा की शर्तें ‘स्पष्ट रूप से मनमानी या तर्कहीन’ नहीं लगतीं तब तक इस मोड़ पर हस्तक्षेप उचित नहीं होगा क्योंकि यह जनहित के खिलाफ होगा।
अदालत ने कहा, “यह एक बहुत बड़ा कार्य है और इस योजना का अंतिम लक्ष्य लाभार्थियों को लाभ पहुंचाना है, वह भी सीमित समय में।”
अदालत के मुताबिक, “हम इस वक्त हस्तक्षेप करने के लिए इच्छुक नहीं हैं। याचिकाएं खारिज की जाती हैं।”
भाषा जितेंद्र