कांवड़ मार्ग पर ढाबा मालिकों के नाम प्रदर्शित करने के आदेश के विरोध पर विहिप ने विपक्ष की आलोचना की
प्रशांत अविनाश
- 18 Jul 2024, 10:02 PM
- Updated: 10:02 PM
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित भोजनालयों से उनके मालिकों के नाम प्रदर्शित करने के उत्तर प्रदेश पुलिस के आदेश पर विपक्षी दलों की आपत्ति के बाद विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने बृहस्पतिवार को उनकी आलोचना की और कहा कि हिंदुओं की आस्था की रक्षा के लिए यह आवश्यक है।
विहिप की यह प्रतिक्रिया तब आई जब कांग्रेस ने मुजफ्फरनगर पुलिस के आदेश की आलोचना करते हुए इसे “भारत की संस्कृति पर हमला” बताया और आरोप लगाया कि इस तरह के आदेश के पीछे की मंशा ‘मुसलमानों के आर्थिक बहिष्कार का सामान्यीकरण करने’ का प्रयास है।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस आदेश को स्पष्ट रूप से ‘भेदभावपूर्ण’ करार दिया और आरोप लगाया कि यह दर्शाता है कि सरकार उत्तर प्रदेश और पूरे देश में मुसलमानों को ‘दूसरे दर्जे’ का नागरिक बनाना चाहती है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस आदेश को “सामाजिक अपराध” करार दिया और अदालतों से मामले का स्वतः संज्ञान लेने को कहा।
इस पर पलटवार करते हुए विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, “मैं उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस को ‘साधुवाद’ देना चाहता हूं, जिसने लोगों (भोजनालय मालिकों) को अपना नाम और पहचान बताने के लिए मजबूर किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ विपक्षी दल भक्तों को गुमराह करने वालों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि इस तरह का आदेश “हिंदू समाज और उसकी आस्था की रक्षा के लिए बहुत जरूरी है” क्योंकि ऐसी घटनाएं हुई हैं जब “कुछ लोगों” ने ग्राहकों को खाद्य पदार्थ बेचने से पहले उसमें थूक दिया।
उन्होंने विपक्षी दलों से ऐसे लोगों का साथ न देने का आग्रह किया।
विहिप प्रवक्ता ने कहा कि अगर दुकानदार अपनी पहचान और नाम बताकर कारोबार करेंगे तो किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने पूछा, “आप (दुकानदार) अपनी पहचान छिपाकर क्या करना चाहते हैं?”
मुजफ्फरनगर पुलिस ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित सभी भोजनालयों को अपने मालिकों के नाम प्रदर्शित करने का आदेश दिया है, ताकि ‘भ्रम की स्थिति’ से बचा जा सके।
इससे कुछ दिन पहले विश्व हिंदू परिषद ने दावा किया था कि मुसलमान अपनी पहचान छिपाकर विभिन्न हिंदू तीर्थ स्थलों पर पूजा सामग्री बेच रहे हैं। साथ ही, उसने सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया था कि वे मुसलमानों को ऐसी दुकानें चलाने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं, ताकि “हिंदुओं की आस्था को ठेस न पहुंचे”।
भाषा प्रशांत