एचआईवी पॉजिटिव सेवानिवृत्त सैनिक के लिए मुआवजा जमा कर दिया गया है: वायु सेना ने न्यायालय में कहा
शोभना मनीषा
- 17 Jul 2024, 05:36 PM
- Updated: 05:36 PM
नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) भारतीय वायुसेना ने उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि 2002 में जम्मू-कश्मीर के सांबा में एक सैन्य अस्पताल में दूषित रक्त चढ़ाने के कारण एचआईवी संक्रमित हुए जवान (अब सेवानिवृत्त) को 18 लाख रुपये दिए गए हैं और मुआवजे की शेष राशि शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में जमा करा दी गई है।
उच्चतम न्यायालय ने सेवानिवृत्त सैनिक की याचिका पर वायुसेना को उन्हें लगभग 1.5 करोड़ रुपए मुआवजे के तौर पर देने का निर्देश पिछले वर्ष 26 सितंबर को दिया था।
इस सैनिक को 13 दिसंबर 2001 को भारतीय संसद पर हुए आतंकवादी हमले के बाद शुरू किए गए ‘ऑपरेशन पराक्रम’ के दौरान बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उन्हें एक यूनिट रक्त चढ़ाना पड़ा था।
शीर्ष अदालत ने इस साल अप्रैल में इस मामले में सितंबर 2023 के अपने फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध करने संबंधी एक याचिका खारिज कर दी थी।
पूर्व सैनिक ने उच्चतम न्यायालय के 2023 के फैसले में जारी निर्देशों की अवमानना का आरोप लगाने वाली एक याचिका दाखिल की जिस पर मंगलवार को पीठ में सुनवाई हुई।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विक्रमजीत बनर्जी ने कहा कि उन्होंने मामले में अनुपालन हलफनामा दायर किया है।
पीठ में न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन भी शामिल थे। पीठ ने कहा कि अदालत की रजिस्ट्री में जमा कराई गई राशि पूर्व सैनिक को जारी की जाए।
इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे एक वकील ने सैनिक की नियमित चिकित्सा जांच के बारे में बताया और कहा कि पीठ इसके लिए उन्हें दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में रेफर करने पर विचार कर सकती है।
पीठ ने कहा कि चूंकि वह व्यक्ति अजमेर में रहता है इसलिए उसे असुविधा न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए जयपुर में अच्छी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकती है।
न्यायमित्र से पीठ ने इस मुद्दे पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के साथ चर्चा करने को कहा ताकि इसे सुलझाया जा सके और मामले को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
उच्चतम न्यायालय ने पांच मार्च को निर्देश दिया था कि 18 लाख रुपये व्यक्ति को दिए जाएं तथा शेष राशि दो सप्ताह के भीतर अदालत की रजिस्ट्री में जमा कराई जाए।
पीठ ने यह भी आदेश दिया था कि याचिकाकर्ता को दिव्यांगता पेंशन देने के लिए उसकी दिव्यांगता को 100 फीसदी समझा जाए।
भाषा शोभना