अदालत ने सुकेश चंद्रशेखर और उनकी पत्नी की 26 महंगी कारें बेचने के आदेश को बरकरार रखा
जितेंद्र वैभव
- 16 Jul 2024, 06:34 PM
- Updated: 06:34 PM
नयी दिल्ली, 16 जलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर की आपराधिक गतिविधियों से अर्जित आय से कथित रूप से खरीदी गईं 26 महंगी गाड़ियों को बेचने की अनुमति देने के आदेश को बरकरार रखा।
उच्च न्यायालय ने कहा कि वाहनों में समय के साथ खराबियां आना स्वभाविक है, जिसकी वजह से उनके मूल्य और कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। अदालत ने ईडी को इन गाड़ियों को बेचकर प्राप्त होने वाली राशि को सावधि जमा में रखने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने चंद्रशेखर की पत्नी लीना पॉलोज की अधीनस्थ न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया, जिसके तहत ईडी को कानून के अनुसार निपटान के लिए दंपति के 26 वाहनों को अपने कब्जे में लेकर बेचने का आदेश दिया गया था।
लीना पॉलोज को 200 करोड़ रुपये की जबरन वसूली के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
अधीनस्थ न्यायालय ने कहा था कि इन वाहनों की नीलामी प्रक्रिया में दिल्ली पुलिस या आर्थिक अपराध शाखा का प्रतिनिधि भी शामिल हो सकता है।
उच्च न्यायालय ने कहा कि लंबे समय तक कंटेनरनुमा गोदाम में रखने या फिर गाड़ियों को लंबे समय तक खड़ा रखने से वाहनों में सड़न पैदा होती है, जिसकी वजह से उनमें कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं और उनकी स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।
अदालत ने कहा, “मौसम की स्थिति जैसे पर्यावरणीय कारक भी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाने में योगदान देते हैं, जिसकी वजह से वाहनों में जंग लगने जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। जंग विशेष रूप से, वाहनों की संरचना और अन्य सभी घटकों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती है।”
दिल्ली पुलिस ने रैनबैक्सी के पूर्व प्रवर्तकों शिविंदर सिंह और मालविंदर सिंह की पत्नियों से 200 करोड़ रुपये की ठगी के आरोप में चंद्रशेखर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके अलावा देश भर में कई मामलों में चंद्रशेखर के खिलाफ जांच जारी है।
चंद्रशेखर और पॉलोज को पहले दिल्ली पुलिस ने अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया था।
दंपति के खिलाफ ईडी ने धन शोधन का भी मामला दर्ज किया था, जिसकी जांच की जा रही है।
पुलिस ने इस मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) भी लगाया है।
दिल्ली पुलिस का आरोप है कि पॉलोज और चंद्रशेखर ने अन्य लोगों के साथ मिलकर हवाला के जरिये अपराध से अर्जित धन को ठिकाने लगाने के लिए फर्जी कंपनियां बनाईं।
भाषा जितेंद्र